मुख्य बातें
- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुथरेल गांव में चार एंबुलेंस आईं, हर एक में एक शव था।
- हिमाचल प्रदेश में हुए सड़क हादसे में चंद्राकर परिवार के चार सदस्य मारे गए।
- परिवार छुट्टियों पर हिमाचल गया था, लेकिन यह सफर उनके लिए अंतिम साबित हुआ।
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हादसे पर दुख व्यक्त किया और रेस्क्यू में सहयोग का आश्वासन दिया।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के कुथरेल गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जब चार एंबुलेंस एक के बाद एक गांव पहुंचीं, जिनमें चंद्राकर परिवार के चार शव थे। यह परिवार हाल ही में हिमाचल प्रदेश के चंबा में छुट्टियां मनाने गया था, लेकिन एक भीषण सड़क हादसे ने उनकी जिंदगियां छीन लीं। इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
हादसे का विवरण
29 मई की रात हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में बैरागढ़-साच पास-किलाड़ मार्ग पर एक कार लगभग 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई। इस दुर्घटना में कार में सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई, जिनमें से चार सदस्य छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चंद्राकर परिवार से थे। मृतकों में अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी प्राची चंद्राकर और उनके दो बेटे दर्श व अक्षद शामिल हैं।
परिवार की पृष्ठभूमि
अरविंद चंद्राकर बेंगलुरु में एक आईटी इंजीनियर थे और उनके परिवार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में भाग लिया था। परिवार की यह यात्रा एक सुखद अनुभव के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनका अंतिम सफर होगा।
शवों की वापसी
हादसे के बाद शवों को निकालने में कई दिन लग गए। मंगलवार को चारों शव रायपुर एयरपोर्ट लाए गए और वहां से चार अलग-अलग एंबुलेंसों में कुथरेल गांव पहुंचाए गए। जैसे ही एंबुलेंस गांव में पहुंचीं, वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया। रिश्तेदारों और गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
पंचायत भवन में चारों शव अंतिम दर्शन के लिए रखे गए। ताबूत खुलते ही परिजनों का दर्द फूट पड़ा। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की आंखें नम थीं और पूरे रास्ते सन्नाटा और सिसकियां सुनाई दे रही थीं। अरविंद के पिता श्यामलाल चंद्राकर ने अपने बेटे, बहू और पोतों को मुखाग्नि दी।
सरकारी प्रतिक्रिया
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया और हिमाचल प्रदेश सरकार से रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग की बात कही। बताया गया कि दुर्घटना स्थल दुर्गम था, जिससे शवों को निकालना कठिन था। कुथरेल गांव में शोक का माहौल है, और हर कोई इस दुखद घटना को लेकर चिंतित है।












