मुख्य बातें
- भिलाई में मां-बेटी का भावुक मिलन, 11 महीने बाद हुई पहचान।
- बबीता देवी की बेटी पूजा ने मां की तलाश में कई मुश्किलें झेली।
- फील परमार्थम आश्रम ने 55 लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया।
- आश्रम मानसिक रूप से अस्थिर लोगों की मदद करता है।
छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक भावुक घटना में 65 वर्षीय बबीता देवी और उनकी 32 वर्षीय बेटी पूजा का 11 महीने बाद पुनर्मिलन हुआ। पूजा ने अपनी मां को भागलपुर से भिलाई तक खोजने के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया। यह मिलन न केवल उनके लिए, बल्कि वहां मौजूद सभी लोगों के लिए एक प्रेरणादायक क्षण बन गया।
मां-बेटी की संघर्ष भरी कहानी
बबीता देवी और पूजा की कहानी संघर्ष और त्याग से भरी हुई है। 32 साल पहले, जब पूजा अपनी मां के गर्भ में थीं, उनके पिता पुण्यदेव सिंह का अपहरण हो गया था। पुण्यदेव, जो सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड में मैनेजर थे, का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। इस घटना ने बबीता देवी को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी का पालन-पोषण अकेले किया।
मां का लापता होना
पूजा के अनुसार, 3 जून 2025 को बबीता देवी अपने मायके जाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। मां के गायब होने के बाद पूजा ने भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार और अन्य जिलों के वृद्धाश्रमों में उनकी तलाश की। उन्होंने पोस्टर छपवाकर सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाए और थानों के चक्कर लगाए।
आश्रम में मिलीं बबीता देवी
भिलाई के कचांदुर मोड़ इलाके में बबीता देवी मानसिक अस्थिरता के कारण भटकती हुई मिलीं। फील परमार्थम आश्रम के सेवक अमित राज की टीम ने उन्हें आश्रम लाया। आश्रम में रहने के दौरान बबीता देवी बार-बार घर जाने की जिद करती रहीं। अंततः, जब उन्होंने अपने गांव का नाम लिया, तो आश्रम प्रबंधन ने बिहार पुलिस से संपर्क किया।
भावुक पुनर्मिलन
फील परमार्थम आश्रम के अमित राज ने बताया कि पुलिस ने परिवार से संपर्क किया और अगले दिन पूजा को सूचना दी गई कि उनकी मां सुरक्षित हैं। पूजा ने बिना आरक्षण के साउथ बिहार एक्सप्रेस से भिलाई पहुंचकर अपनी मां से मिलकर भावुकता में रो पड़ीं।
आश्रम का योगदान
फील परमार्थम आश्रम मानसिक रूप से अस्थिर और बेसहारा लोगों की मदद करता है। अब तक 200 से अधिक लोगों को आश्रय दिया जा चुका है, और 55 लोगों को उनके परिवारों से मिलवाया गया है। आश्रम में रहने वालों को भोजन, इलाज और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। बबीता देवी और पूजा का मिलन इस प्रयास का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।












