मुख्य बातें
- कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान मिट्टी धंसने से दो इंजीनियरों की मौत हुई।
- जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी की नौकरी को केवल तीन महीने हुए थे।
- परिजनों ने रेलवे प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
- हादसे के बाद निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों पर सवाल उठे हैं।
राजस्थान के कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण कार्य के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में दो इंजीनियरों की जान चली गई। यह घटना गुरुवार रात करीब 8 बजे दरा घाटी क्षेत्र में हुई, जब मिट्टी धंसने से जूनियर इंजीनियर प्रभात सिंह सोलंकी और पंकज कुमार झा दब गए। इस हादसे ने उनके परिवारों में शोक की लहर दौड़ा दी है और रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हादसे का विवरण
गुरुवार रात को कोटा के दरा घाटी क्षेत्र में नेशनल हाईवे-52 के पास रेलवे अंडर ब्रिज पर बॉक्स पुशिंग का कार्य चल रहा था। इसी दौरान प्रभात सिंह सोलंकी और पंकज कुमार झा निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रहे थे, तभी अचानक मिट्टी धंस गई। सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन दोनों इंजीनियरों को गंभीर चोटों के कारण बचाया नहीं जा सका।
परिजनों की प्रतिक्रिया
प्रभात सिंह सोलंकी के परिवार ने रेलवे प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उन्हें एक जोखिम भरे प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया था, जबकि वे अभी प्रशिक्षण के दौर में थे। परिवार ने इस हादसे को लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया
रेलवे के सीनियर डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि यह हादसा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस कॉरिडोर परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के दौरान हुआ। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को नियमानुसार सहायता प्रदान की जाएगी और हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
भविष्य की सुरक्षा चिंताएं
इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और कार्यस्थल पर इंजीनियरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।












