मुख्य बातें
- नयापुरा चिड़ियाघर में 9 साल बाद पायथन ने 18 अंडे दिए हैं।
- अंडों से बच्चों के बाहर आने की सर्वाइवल रेट 5 से 10 फीसदी है।
- चिड़ियाघर प्रशासन ने पायथन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
- कोटा में कोबरा का रेस्क्यू कर अंडों को चिड़ियाघर लाया गया।
कोटा के नयापुरा चिड़ियाघर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर आई है। यहां 9 साल बाद एक मादा पायथन ने 18 अंडे दिए हैं, जो 2017 के बाद पहली बार हुआ है। इस घटना ने वन्यजीव विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन में खुशी का माहौल बना दिया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इन अंडों से बच्चों के सुरक्षित बाहर आने की संभावना केवल 5 से 10 फीसदी है।
विशेष इंतजाम किए गए
गर्मी और प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, चिड़ियाघर प्रशासन ने पायथन के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पिंजरे में रेत, नियंत्रित वातावरण और पानी के दो कुंड तैयार किए गए हैं, ताकि तापमान और नमी का संतुलन बना रहे। ये दोनों चीजें अंडों के सुरक्षित विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
मादा पायथन का व्यवहार
मादा पायथन अपने अंडों के चारों ओर कुंडली मारकर बैठी हुई है, जो कि अंडों की सुरक्षा और तापमान बनाए रखने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। चिड़ियाघर का स्टाफ लगातार इस प्रक्रिया पर नजर रख रहा है और हर गतिविधि की निगरानी कर रहा है।
कोबरा का रेस्क्यू
इसी बीच, कोटा के मंडाना क्षेत्र के उम्मेदपुरा गांव से सर्प संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है। यहां 6 फीट लंबे कोबरा का रेस्क्यू किया गया। सूचना मिलने पर सर्प रेस्क्यू टीम के सदस्य मौके पर पहुंचे और जांच के दौरान एक कोबरा मृत अवस्था में पाया गया, जिसके पास 15 से 17 अंडे थे। टीम ने अंडों को सुरक्षित रेस्क्यू कर चिड़ियाघर पहुंचाया, ताकि उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जा सके।












