मुख्य बातें
- राजस्थान के खरवाड़ा गांव में पानी की गंभीर कमी से लोग परेशान हैं।
- 15 आदिवासी परिवारों को 3 से 5 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है।
- जल जीवन मिशन का लाभ गांव तक नहीं पहुंचा है, जिससे नाराजगी बढ़ी है।
- प्रशासन ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों की चिंताएं बरकरार हैं।
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के खरवाड़ा गांव में पानी की गंभीर कमी ने स्थानीय आदिवासी परिवारों के जीवन को कठिन बना दिया है। यहां रहने वाले लगभग 15 परिवारों को रोजाना 3 से 5 किलोमीटर दूर पहाड़ियों से पानी लाना पड़ता है। इस समस्या ने न केवल उनकी दैनिक दिनचर्या को प्रभावित किया है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी नकारात्मक असर डाला है।
पानी की खोज में कठिनाई
गांव के लोग सुबह सूरज निकलने से पहले ही पानी की तलाश में निकल पड़ते हैं। कई बार उन्हें ऊंची पहाड़ियों और पथरीले रास्तों से होकर गड्ढों में जमा पानी तक पहुंचना पड़ता है। वहां से बर्तन भरकर पानी गधों पर लादकर वापस गांव लाना होता है। ककूड़ी मीणा, एक बुजुर्ग महिला, ने बताया कि वह पिछले 40 साल से इसी तरह पानी लाने का काम कर रही हैं।
शिक्षा पर असर
पानी की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। प्रियंका मीणा, जो 12वीं कक्षा की छात्रा हैं, ने कहा कि उन्हें पहले पानी लाना पड़ता है, फिर स्कूल जाना होता है। कई बार पानी भरने में इतना समय लग जाता है कि वह स्कूल देर से पहुंचती हैं।
जल जीवन मिशन का लाभ नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन का लाभ खरवाड़ा गांव तक नहीं पहुंचा है। गांव के पास एक पानी की टंकी बनी है, लेकिन वहां से बस्ती तक पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ी है।
प्रशासन का आश्वासन
उपखंड अधिकारी निलेश कलाल ने कहा कि समस्या की जानकारी मिलने के बाद निरीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन का काम फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण अटका हुआ है। फिलहाल, टैंकर से पानी सप्लाई की व्यवस्था की गई है और स्थायी समाधान के लिए प्रयास जारी हैं।
हालांकि, गांव के लोग वादों से ज्यादा पानी की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक गांव तक पाइपलाइन नहीं पहुंचेगी और नियमित पानी नहीं मिलेगा, तब तक उनकी मुश्किलें कम नहीं होंगी।












