मुख्य बातें
- नागौर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन स्थापित होगा।
- 43.62 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना का कार्य 2026 में पूरा होगा।
- कचरे का संपीडन और प्रबंधन एक ही परिसर में किया जाएगा।
- आधुनिक तकनीक से कचरा प्रबंधन प्रक्रिया को और बेहतर बनाया जाएगा।
नागौर में ठोस कचरे के संग्रहण और निस्तारण की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत मैकेनाइज्ड ट्रांसफर स्टेशन (एमटीएस) स्थापित करने की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना 43.62 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी और इसका कार्य 24 मार्च 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
परियोजना की मुख्य बातें
इस परियोजना के तहत, विभिन्न वार्डों से एकत्रित कचरे को सीधे डंपिंग यार्ड ले जाने के बजाय पहले ट्रांसफर स्टेशन पर लाया जाएगा। यहां कचरे का संपीडन और प्रबंधन किया जाएगा, जिससे कचरा प्रबंधन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित हो सकेगी।
सुविधाओं का विकास
ट्रांसफर स्टेशन परिसर में बाउंड्री वॉल, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज नेटवर्क और बड़ा संचालन शेड बनाया जाएगा। इसके साथ ही गार्ड रूम, कंट्रोल रूम, कार्यालय, डीजी सेट कक्ष, शौचालय, भूमिगत जल टैंक और लीचेट टैंक जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
आधुनिक मशीनरी का उपयोग
परियोजना के तहत एक वेट ब्रिज, दो हुक लोडर, तीन कंटेनर और दो स्टेटिक कॉम्पेक्टर स्थापित किए जाएंगे। इन मशीनों की सहायता से कचरे को संपीडित कर बड़े कंटेनरों में संग्रहित किया जा सकेगा। वाहनों की आवाजाही और संचालन की निगरानी के लिए बूम बैरियर और सीसीटीवी सिस्टम भी लगाए जाएंगे।
पर्यावरण सुरक्षा के उपाय
परिसर में वॉशिंग प्लेटफॉर्म और प्रेशर वॉशर की व्यवस्था होगी, जिससे कंटेनरों और वाहनों की नियमित सफाई की जा सकेगी। कचरे से निकलने वाले तरल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन के लिए लीचेट टैंक बनाया जाएगा। इसके अलावा, फायर प्रोटेक्शन सिस्टम, विद्युत कनेक्शन, प्लम्बिंग और अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
तकनीकी निगरानी
परियोजना में आईसीटी सॉफ्टवेयर, स्मार्ट सॉल्यूशन और अन्य डिजिटल व्यवस्थाओं का भी प्रावधान रखा गया है। इससे संचालन, निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। परियोजना के पूरा होने के बाद नागौर को ठोस कचरा प्रबंधन का एक आधुनिक आधारभूत ढांचा प्राप्त होगा।












