मुख्य बातें
- भोपाल में बर्फ की सिल्लियों का रखरखाव बेहद गंदा पाया गया है।
- कुत्तों द्वारा चाटी गई बर्फ का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
- नगर निगम ने बर्फ व्यापारियों को खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है।
- दूषित बर्फ की पहचान पर नागरिकों से सूचना देने की अपील की गई है।
भोपाल में बर्फ की सिल्लियों के गंदे रखरखाव का मामला सामने आया है, जहां काजी कैंप में आवारा कुत्तों ने बर्फ की सिल्लियों को चाटकर प्यास बुझाई। नगर निगम की स्वास्थ्य टीम ने इस पर कार्रवाई करते हुए संचालकों पर जुर्माना लगाया और 200 किलो बर्फ को नाले में फेंक दिया। यह घटना खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
घटना का विवरण
काजी कैंप में बर्फ के डिपो में बेतरतीब रखी गई बर्फ की सिल्लियों को आवारा कुत्तों ने चाट लिया। इस दौरान डिपो संचालक राहुल और राजा साहू ने कुत्तों को भगाने का प्रयास नहीं किया। जब यह वीडियो वायरल हुआ, तो नगर निगम के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी शाहाब खान की टीम ने तुरंत कार्रवाई की।
बर्फ का उपयोग और स्वास्थ्य जोखिम
इस बर्फ का उपयोग मुख्य रूप से गन्ने के रस और अन्य शीतल पेय में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्तों के मुंह में मौजूद बैक्टीरिया इंसानों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इनमें कैनोसाइटोफैगाः, साल्मोनेला और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया शामिल हैं, जो पेट में संक्रमण और फूड प्वॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं।
नगर निगम की कार्रवाई
नगर निगम ने बर्फ व्यापारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करें। उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द करने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नागरिकों से अपील की गई है कि यदि वे खुले में दूषित बर्फ देखें, तो निगम के हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।
बर्फ की बिक्री का विवरण
भोपाल में लांबाखेड़ा, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र और बैरागढ़ में बर्फ की फैक्ट्रियां हैं। शहर में रोजाना 50 किलो की 300 बर्फ की सिल्लियां बेची जाती हैं। ये सिल्लियां ठेलों, होटल और रेस्टोरेंट में उपयोग की जाती हैं। इस बार निगम ने 300 से अधिक फुटकर दुकानों को जूस और जलजीरा बेचने के अस्थायी परमिट दिए हैं।












