मुख्य बातें
- चुनाव आयोग ने ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में SIR प्रक्रिया शुरू की।
- बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाता जानकारी एकत्र कर रहे हैं।
- 28 जून तक फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि है, अन्यथा विकल्प उपलब्ध है।
- चुनाव आयोग ने फर्जी मतदाताओं को सूची से हटाने का लक्ष्य रखा है।
चुनाव आयोग ने ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के गिनती चरण की शुरुआत कर दी है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी सीधे घरों में जाकर मतदाता जानकारी एकत्र कर रहे हैं। यह प्रक्रिया 28 जून तक चलेगी, जिसके बाद ही मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाएंगे।
SIR प्रक्रिया का उद्देश्य
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट किया है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी योग्य नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और अयोग्य व्यक्तियों को बाहर रखा जाए। आयोग के अनुसार, हर भारतीय नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक है, वह मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए पात्र है।
मतदाता जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया
इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर इन्यूमरेशन फॉर्म वितरित कर रहे हैं। वे जानकारी एकत्र करने के साथ-साथ उसे वेरिफाई भी कर रहे हैं। इस बार चुनाव आयोग ने 38,123 बूथ लेवल ऑफिसर्स और 8,391 बूथ लेवल एजेंट्स को तैनात किया है। ओडिशा में अकेले 3.34 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, जबकि मणिपुर में 20.92 लाख, मिजोरम में 8.75 लाख और सिक्किम में 4.71 लाख मतदाता इस प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं।
डेडलाइन और विकल्प
28 जून तक फॉर्म जमा न करने पर मतदाता का अधिकार नहीं छिनता। चुनाव आयोग ने बैकअप योजना बनाई है। यदि कोई समय सीमा के भीतर फॉर्म नहीं जमा कर पाता है, तो वह दावों और आपत्तियों के दौर में ‘फॉर्म 6’ भरकर नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। इसे वह अपने क्षेत्र के बीएलओ को सौंप सकता है या ऑनलाइन भी जमा कर सकता है।
दस्तावेजों की जांच
SIR प्रक्रिया के दौरान विभिन्न दस्तावेजों की जांच की जाएगी, जिनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड, और अन्य शामिल हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल सही और योग्य मतदाता ही सूची में शामिल हों।
प्रक्रिया का विस्तार
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया लागू की जा चुकी है। पहले चरण में बिहार में और दूसरे चरण में 12 राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है। इस बार घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने से फर्जी मतदाताओं को हटाने में मदद मिलेगी।












