मुख्य बातें
- मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए तीन सीटों पर चुनाव होंगे।
- भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।
- कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का खतरा, भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतार सकती है।
- राज्यसभा की तीन सीटें 21 जून को खाली हो रही हैं।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं, जहां तीन सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इनमें से दो सीटें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास हैं और एक सीट कांग्रेस के पास है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने में अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन राजनीतिक हलचल के बीच भाजपा इस सप्ताह अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर सकती है।
राजनीतिक हलचल
राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश में भाजपा के भीतर मंथन जारी है। अंतिम निर्णय दिल्ली से लिया जा सकता है, और इस सप्ताह उम्मीदवारों की सूची जारी होने की संभावना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है। विधानसभा के विधायकों की संख्या को देखते हुए भाजपा तीसरा उम्मीदवार भी खड़ा कर सकती है, जिससे कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस भी राज्यसभा चुनाव में सावधानी से कदम रख रही है। भाजपा के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही कांग्रेस अपने पत्ते खोलेगी। यदि भाजपा तीसरी सीट पर भी प्रत्याशी उतारती है, तो कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को मैदान में उतार सकती है। यदि भाजपा केवल दो उम्मीदवार उतारती है, तो कांग्रेस की रणनीति सीमित रह जाएगी।
खाली सीटों की जानकारी
मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। 21 जून को तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से दो भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन की हैं, जबकि कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की सीट भी खाली हो रही है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 164 विधायक हैं।
गणित में बदलाव
राज्यसभा में कांग्रेस की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों की आवश्यकता है। कांग्रेस के 65 विधायकों में से तीन विधायकों पर संकट आ गया है, जिससे उनकी संख्या 62 रह जाती है। यदि चार विधायक निष्क्रिय हो जाते हैं, तो यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। इससे पहले, कांग्रेस के नेता उमंग सिंघार ने भाजपा पर विधायकों को तोड़ने की साजिश का आरोप लगाया था।
कांग्रेस नेताओं पर संकट
कांग्रेस के तीन नेताओं की स्थिति भी चिंताजनक है। विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे दलबदल कानून के दायरे में हैं, जबकि दतिया से विधायक को आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई है।












