मुख्य बातें
- अमेरिका में मच्छर नियंत्रण के लिए 3.2 करोड़ वोल्बाचिया संक्रमित मच्छर छोड़े जाएंगे।
- इस तकनीक से मच्छरों की आबादी में तेजी से कमी आने की उम्मीद है।
- सिंगापुर में इसी तकनीक से डेंगू के मामलों में 70% तक गिरावट आई है।
- भारत में भी वोल्बाचिया मच्छरों पर शोध जारी है, दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया जा रहा है।
अमेरिका में मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ एक नई रणनीति के तहत, वैज्ञानिकों ने वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित 3.2 करोड़ मच्छरों को छोड़ने की योजना बनाई है। यह प्रयोग फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया के कुछ क्षेत्रों में किया जाएगा, जिसका उद्देश्य डेंगू और अन्य मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण पाना है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर जनता से सुझाव मांगे गए हैं, जिनकी अंतिम तिथि 5 जून 2026 है।
वोल्बाचिया बैक्टीरिया की भूमिका
यह तकनीक वोल्बाचिया नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया पर आधारित है, जो कई कीटों में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है। जब वोल्बाचिया से संक्रमित नर मच्छरों को छोड़ा जाता है, तो वे मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, लेकिन उनके अंडों से मच्छर नहीं निकलते। इस प्रक्रिया से मच्छरों की संख्या में तेजी से कमी आती है।
प्रारंभिक परीक्षणों के परिणाम
कैलिफोर्निया की सेंट्रल वैली में किए गए प्रारंभिक परीक्षणों में मच्छरों की संख्या में 95 प्रतिशत से अधिक कमी देखी गई। कुछ क्षेत्रों में तो मच्छर लगभग गायब हो गए हैं। इसी तकनीक का उपयोग सिंगापुर ने डेंगू नियंत्रण के लिए किया, जहां डेंगू के मामलों में 70 प्रतिशत तक गिरावट आई।
भारत में स्थिति
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर (वीसीआरसी) ने पुडुचेरी में वोल्बाचिया संक्रमित मच्छरों पर प्रारंभिक शोध किया है। हालांकि, भारत सरकार इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले इसके दीर्घकालिक प्रभावों और पर्यावरणीय सुरक्षा का मूल्यांकन कर रही है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो यह भारत के लिए एक सकारात्मक विकास होगा।












