मुख्य बातें
- गुजरात के गिर जंगल में शेरों में महामारियों का प्रकोप बढ़ा है।
- भावनगर वन विभाग ने 118 शेरों की स्वास्थ्य रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है।
- 47 शेरों की जांच में 19 पर एहतियाती उपाय किए गए हैं।
- पैदल गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लक्षणों पर नजर रखी जा सके।
गुजरात के गिर जंगल में कैनिन डिस्टेंपर वायरस (CDV) और बेबेसिया जैसी जानलेवा महामारियों के प्रकोप के चलते भावनगर वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। गिर पूर्व और गिर पश्चिम वन प्रभागों में हाल ही में 8 से अधिक शेरों और उनके शावकों की मौत हो गई है, जिससे वन विभाग ने सभी 118 शेरों की स्वास्थ्य रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है।
शेरों की स्वास्थ्य जांच
भावनगर वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में जेसर, पालीताना, महुवा, सिहोर और भावनगर रेंज में कुल 118 शेर निवास कर रहे हैं। इनमें से पालीताना रेंज में 17 शेरों का एक बड़ा समूह सक्रिय है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, वन विभाग ने शेरों की चौबीसों घंटे निगरानी शुरू कर दी है।
जांच के आंकड़े
उप वन संरक्षक (DCF) योगेश देसाई ने बताया कि अब तक 47 शेरों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है, जिनमें से सभी स्वस्थ पाए गए हैं। विभिन्न रेंजों में निरीक्षण के दौरान महुवा रेंज में 12, जेसर रेंज में 12, सिहोर रेंज में 11, पालीताना रेंज में 8 और भावनगर रेंज में 4 शेरों की जांच की गई है।
एहतियाती उपाय
जांच के दौरान 19 शेरों पर एहतियाती उपाय किए गए हैं। डीवर्मिंग और डी-टिकिंग अभियान चलाया जा रहा है ताकि शेरों को आंतरिक और बाहरी परजीवियों से सुरक्षित रखा जा सके। आने वाले दिनों में शेष बचे सभी शेरों का भी स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
गश्त के निर्देश
महामारी के खतरे को देखते हुए, उप वन संरक्षक ने सभी वन क्षेत्रों में पैदल गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों को शेरों में चार मुख्य लक्षणों पर ध्यान देने के लिए कहा गया है, जैसे कि शेरों का अलग-थलग होना, शारीरिक कमजोरी, रास्ता भटकना, और आंखों, नाक या मुंह से पानी बहना। ऐसे लक्षण दिखने पर शेरों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा।












