बिहार सरकार का विदेशी सोशल मीडिया अभियान से पर्यटन को बढ़ावा
बिहार सरकार अब राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विदेशी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स का सहारा ले रही है। इस डिजिटल पहल का उद्देश्य बिहार की विरासत और पर्यटन स्थलों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाना है। पहली बार, बिहार पर्यटन को एक मजबूत ब्रांड बनाने के लिए विदेशी डिजिटल क्रिएटर्स को इस मिशन में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से ‘ब्रांड बिहार’ की पहचान मजबूत होगी और पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
विदेशी कंटेंट क्रिएटर्स की भागीदारी और रणनीति
बिहार सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग लिया है, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने इन विदेशी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को इस अभियान में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, अब तक तीन दर्जन से अधिक कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स को विभिन्न देशों से बिहार लाया गया है। ये डिजिटल क्रिएटर्स वीडियो, टेक्स्ट, इमेज और पॉडकास्ट के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन स्थलों का प्रचार कर रहे हैं। सरकार का विश्वास है कि सोशल मीडिया के प्रभाव से बिहार की पर्यटन संभावनाओं को नई ऊर्जा मिलेगी।
डिजिटल प्रचार के पीछे का मकसद और भविष्य की योजनाएं
बिहार सरकार का यह कदम डिजिटल युग में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। एक सर्वे के अनुसार, लगभग 35 प्रतिशत लोग यात्रा की योजना बनाने से पहले सोशल मीडिया रिव्यू और वीडियो देखते हैं। खासतौर पर 40 वर्ष से कम उम्र के युवा सोशल मीडिया पोस्ट, पॉडकास्ट, ट्रैवल ब्लॉग और रील्स को अपनी अगली यात्रा का आधार मानते हैं। इसी कारण, मलेशिया, मंगोलिया, जापान, श्रीलंका, कोरिया, थाईलैंड जैसे देशों के कंटेंट क्रिएटर्स बिहार पहुंच चुके हैं। दिसंबर 2025 से शुरू हुई इस यात्रा में, पहले करीब 20 इन्फ्लुएंसर्स बिहार आए थे, जिनमें से कई ने गया, नालंदा, पटना, सीतामढ़ी और नवादा जैसे पर्यटन स्थलों पर आकर्षक कंटेंट तैयार किया। जापान के ककेटकू, मंगोलिया की एनखबाटर कनखबूलगर और मलेशिया के इएकैट्समे जैसे क्रिएटर्स ने बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाया है। सरकार का लक्ष्य है कि इन डिजिटल अभियानों से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिले और ‘ब्रांड बिहार’ को नई पहचान मिले।












