मुख्य बातें
- बिहार में रिशु श्री की गिरफ्तारी से टेंडर घोटाले की जांच तेज हुई है।
- जांच एजेंसियों ने रिशु श्री के साथ जुड़े अधिकारियों की सूची तैयार की है।
- दो आईएएस अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया गया है।
- रिशु श्री की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
बिहार में सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार के मामले में टेंडर मैनेज करने वाले रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। रिशु श्री के करीबी एक दर्जन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है, जिससे राज्य की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी और राज्य की स्पेशल विजिलेंस यूनिट सक्रिय हो गई है।
जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है
सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत, मोबाइल चैट और कॉल डिटेल्स बरामद हुए हैं। इन सबूतों के आधार पर रिशु श्री से जुड़े अधिकारियों और सहयोगियों की सूची तैयार की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी टेंडर के आवंटन और भुगतान में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही है।
आईएएस अधिकारियों पर गाज
इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों, अभिलाषा शर्मा और योगेश कुमार सागर, को निलंबित किया गया है। इनकी भूमिका को लेकर सरकार अब प्राथमिकी दर्ज करने पर विचार कर रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए सबूतों के आधार पर ही लिया जाएगा।
रिशु श्री की कंपनियों पर कार्रवाई
रिशु श्री की आठ कंपनियों को भी जांच एजेंसियों ने अपने रडार पर रखा है। इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है, जिसमें उनके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने की योजना भी शामिल है। जानकारी के अनुसार, रिशु श्री ने पिछले 16 महीनों में 12 बार विदेश यात्रा की है, जो जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम
बिहार सरकार इस मामले में सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और आपराधिक मामले दर्ज करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी सबूत पर्याप्त हैं ताकि उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।












