मुख्य बातें
- लखनऊ के केजीएमयू में करोड़ों रुपये के दवा खरीद घोटाले का खुलासा हुआ है।
- यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अपुल गोयल को पद से हटा दिया गया है।
- पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर आपराधिक मामला चलाने की मांग की गई है।
- जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में असाध्य योजना के तहत करोड़ों रुपये के दवा खरीद घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है, जिसमें यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा, एक रेगुलर फार्मासिस्ट को सस्पेंड किया गया और तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है।
घोटाले का विवरण
केजीएमयू के अधिकारियों के अनुसार, यूरोलॉजी विभाग में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए असाध्य योजना के तहत हर महीने लगभग 10 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती थीं। लेकिन इस साल की शुरुआत में दवाओं का खर्च अचानक 3 से 4 गुना बढ़ गया। पिछले महीने दवा खरीद का बिल 45 लाख रुपये तक पहुंच गया, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई।
जांच की प्रक्रिया
जब रिकॉर्ड की जांच की गई, तो पता चला कि लगभग 40 मरीजों के नाम पर कैंसर की महंगी दवाएं, प्रोटीन और आयरन सप्लीमेंट्स बार-बार खरीदे गए थे। इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए केजीएमयू की वाइस चांसलर डॉ. सोनिया नित्यानंद ने तुरंत एक 5 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को प्रस्तुत की, जिसके बाद प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की।
प्रशासनिक कार्रवाई
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि डॉ. अपुल गोयल को योजना की निगरानी में लापरवाही बरतने के आरोप में पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. एचएस पाहवा को कार्यवाहक हेड नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, घोटाले में शामिल आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी गई हैं।
आगे की स्थिति
प्रशासन ने इस मामले में पुलिस जांच की मांग की है, जिससे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले की जांच पूरी होने तक सभी संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।












