मुख्य बातें
- कानपुर में 45 लीटर क्षमता वाली कार की टंकी में 52 लीटर पेट्रोल भरा गया।
- जिला पूर्ति विभाग ने जांच में मशीनों में कोई गड़बड़ी नहीं पाई।
- शिकायतकर्ता ने अधिकारियों पर जांच में देरी का आरोप लगाया।
- वाहन निर्माता कंपनी ने भी अतिरिक्त पेट्रोल भरने की संभावना को नकारा।
कानपुर में एक पेट्रोल पंप पर 45 लीटर क्षमता वाली कार की टंकी में 52 लीटर पेट्रोल भरने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके वाहन की टंकी में पहले से 2 से 3 लीटर ईंधन था, फिर भी 52 लीटर पेट्रोल भरा गया। इस घटना ने प्रशासन और उपभोक्ताओं के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक वाहन मालिक ने पेट्रोल पंप पर अपनी कार की टंकी में 52 लीटर पेट्रोल भरने की शिकायत की। शिकायत के बाद जिला पूर्ति विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन मशीनों में कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं पाई गई। डीएसओ राकेश कुमार ने बताया कि वाहन के मैनुअल के अनुसार, टंकी की निर्धारित क्षमता के अलावा भी कुछ अतिरिक्त ईंधन समा सकता है।
शिकायतकर्ता का आरोप
शिकायतकर्ता ने कहा कि पेट्रोल भरवाने से पहले उसकी गाड़ी में 2 से 3 लीटर ईंधन था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बाद अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई नहीं की और जांच में डेढ़ दिन का समय लगा। उनका कहना है कि इस देरी से पेट्रोल पंप को अपनी कमियों को छिपाने का समय मिल गया।
वाहन निर्माता की प्रतिक्रिया
इस बीच, वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन के मैनेजर ने कहा कि उनके टेक्नीशियन का मानना है कि इस मॉडल की गाड़ी में 52 लीटर या उससे अधिक पेट्रोल आना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकतम 4 से 5 लीटर का अंतर हो सकता है।
जांच की स्थिति
हालांकि प्रशासनिक जांच में पेट्रोल पंप की मशीनों को सामान्य बताया गया है, लेकिन शिकायतकर्ता और वाहन से जुड़ी तकनीकी जानकारी ने मामले को और जटिल बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 45 लीटर क्षमता वाली टंकी में 52 लीटर पेट्रोल कैसे भरा गया। यह मामला अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है।












