उत्तर प्रदेश में भूसा संग्रहण का विवादित आदेश
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक अनूठे फरमान ने पूरे सूबे में हलचल मचा दी है। इस आदेश के तहत सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से भूसा जमा करने का निर्देश दिया गया, जो कि शिक्षकों के बीच गहरी नाराजगी का कारण बन गया है। इस आदेश का उद्देश्य बेसहारा और निराश्रित गोवंश के लिए भूसा एकत्रित करना था, लेकिन शिक्षकों ने इसे अपने सम्मान और मर्यादा के खिलाफ माना है।
शिक्षकों का विरोध और विभाग का कड़ा कदम
बरेली के नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता जैसे कई विकास खंडों के खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) ने स्कूलों और शिक्षकों को पत्र भेजकर कहा कि गर्मी के मौसम में गोवंश के लिए 46 किलो से लेकर 100 किलो तक भूसा जमा करना जरूरी है। यदि एक सप्ताह के भीतर यह कार्य पूरा नहीं किया गया, तो शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर यह आदेश वायरल होते ही शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने इसे मानसिक उत्पीड़न और विभाग का अनुचित फरमान बताया।
बरेली बीएसए का कड़ा रुख और नई दिशा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. विनीता ने तुरंत ही कार्रवाई की। उन्होंने नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही स्पष्ट किया कि शासन या विभाग ने कभी भी शिक्षकों से भूसा संग्रह का कोई अनिवार्य आदेश नहीं दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश पूरी तरह से गलत और अनुचित था। विभाग ने आदेश में संशोधन कर कहा कि यह केवल स्वैच्छिक दान के रूप में ही किया जाना चाहिए था।
डॉ. विनीता ने शिक्षकों से अपील की कि वे गर्मी के मौसम में अपने स्कूलों के परिसर में पक्षियों के लिए पानी और दाना रखें, ताकि वे भीषण गर्मी में राहत पा सकें। वहीं, बरेली के जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह ने कहा कि इस मामले की पूरी जानकारी ली जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने समाज से भी अपील की कि वे गोवंश की सुरक्षा के लिए आगे आएं और इसे धार्मिक कार्य के रूप में देखें।












