मुख्य बातें
- इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल का उदय।
- BaaS मॉडल से ग्राहकों को बैटरी की कीमत अलग से चुकानी होती है।
- MG कॉमेट EV और विंडसर EV जैसे मॉडल BaaS विकल्प के साथ उपलब्ध हैं।
- भविष्य में BaaS मॉडल भारतीय EV बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल ने ग्राहकों के लिए एक नया विकल्प प्रस्तुत किया है। इस मॉडल के तहत, ग्राहक इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं लेकिन बैटरी की कीमत अलग से चुकाते हैं। इससे कार की शुरुआती लागत में कमी आती है, जिससे अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
BaaS मॉडल की विशेषताएँ
Battery-as-a-Service (BaaS) एक ऐसा व्यवसायिक मॉडल है जिसमें वाहन और बैटरी को अलग-अलग माना जाता है। ग्राहक केवल इलेक्ट्रिक कार खरीदता है, जबकि बैटरी का उपयोग किराए या सब्सक्रिप्शन के आधार पर किया जाता है। इस व्यवस्था में बैटरी की कीमत वाहन की एक्स-शोरूम कीमत में शामिल नहीं होती, जिससे शुरुआती निवेश कम हो जाता है।
लाखों रुपये की बचत
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी इलेक्ट्रिक कार की कुल कीमत में बैटरी का हिस्सा लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है। जब बैटरी की लागत अलग कर दी जाती है, तो कार की शुरुआती कीमत कई लाख रुपये तक कम हो जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी EV की कुल कीमत 15 लाख रुपये है, तो BaaS मॉडल के तहत इसकी कीमत लगभग 7.2 लाख से 10.5 लाख रुपये के बीच हो सकती है।
भारतीय बाजार में BaaS का प्रभाव
भारतीय बाजार में MG कॉमेट EV और विंडसर EV जैसी कारें पहले से ही BaaS मॉडल के तहत उपलब्ध हैं। MG कॉमेट EV को खासतौर पर शहरी उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह पहली बार EV खरीदने वालों के लिए आकर्षक विकल्प बनती है।
बैटरी की देखभाल की जिम्मेदारी
BaaS मॉडल में बैटरी की देखभाल और रिप्लेसमेंट की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता कंपनी की होती है। इससे ग्राहकों का जोखिम कम हो जाता है, क्योंकि उन्हें बैटरी की लाइफ और उसके रिप्लेसमेंट की चिंता नहीं करनी पड़ती।
लंबी अवधि में खर्च का आकलन
हालांकि, BaaS मॉडल सभी ग्राहकों के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता। यदि कोई व्यक्ति अपनी कार का अत्यधिक उपयोग करता है, तो बैटरी शुल्क लंबे समय में बढ़ सकता है। ऐसे में, EV खरीदने से पहले अपनी ड्राइविंग जरूरतों का आकलन करना आवश्यक है।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में BaaS मॉडल भारतीय EV बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर काम कर रही है। जैसे-जैसे बैटरी तकनीक में सुधार होगा, अधिक कंपनियाँ इस मॉडल को अपनाएँगी, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद आसान होगी।












