दिल्ली में जल संकट की भयावह स्थिति
राजधानी दिल्ली वर्तमान में गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यमुना नदी का जलस्तर इतना गिर चुका है कि कई स्थानों पर नदी का तल स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि नदी का सूखना शहर की जल आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा है।
यमुना का सूखना और जल आपूर्ति पर प्रभाव
आज तक की ग्राउंड रिपोर्ट में दिखाया गया है कि यमुना नदी का जलस्तर इतना कम हो गया है कि पानी का प्रवाह लगभग समाप्त हो चुका है। यमुना के बीचोबीच पहुंचकर रिपोर्टर ने देखा कि पानी की धारा बहुत ही पतली और सूखी सी प्रतीत हो रही है। वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी पहुंचाने में भी बाधाएं आ रही हैं। जल स्तर 674.50 फीट होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह घटकर 667.50 फीट पर पहुंच गया है, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
मजदूरों का अस्थायी रास्ता बनाना और जल संकट का समाधान
इस गंभीर स्थिति में मजदूरों की मदद से नदी के अंदर अस्थायी चैनल का निर्माण किया जा रहा है ताकि पानी को वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जा सके। सोनिया विहार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक यह छोटा रास्ता बन चुका है। मजदूर लगातार पानी से रेत को अलग कर रहे हैं ताकि पानी का प्रवाह तेज हो सके। इस प्रयास से पता चलता है कि जल संकट कितनी गंभीर हो चुकी है।
वहीं, हरियाणा से दिल्ली को रोजाना करीब 1100 मिलियन गैलन (MGD) पानी की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में केवल 900 MGD ही मिल पा रहा है। इस कमी का सीधा असर दिल्ली के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां पानी की भारी किल्लत है। सेंट्रल, नॉर्थ और ओल्ड दिल्ली के कई हिस्सों में लोग घंटों लाइन में लगकर पानी भरने को मजबूर हैं। वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से लगभग 127 MGD पानी की आपूर्ति होती है, जो शहर की सबसे बड़ी जल स्रोत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना के सूखने के पीछे हरियाणा से कम पानी छोड़ा जाना, बढ़ती गर्मी और वाष्पीकरण, बारिश की कमी और नदी में प्राकृतिक प्रवाह का कम होना मुख्य कारण हैं। इन सभी कारकों ने राजधानी के जल संकट को और भी गहरा कर दिया है।











