मुख्य बातें
- दिल्ली के कालिंदी कुंज में दहेज उत्पीड़न के मामले में तीन आरोपियों को 10 साल की सजा मिली।
- महिला को दहेज की मांग को लेकर बालकनी से फेंकने का आरोप है, जिससे वह लकवाग्रस्त हो गई।
- अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया और मुआवजे का आदेश दिया।
- यह फैसला दहेज उत्पीड़न के खिलाफ सख्त कानून के कार्यान्वयन का प्रतीक है।
दिल्ली के कालिंदी कुंज इलाके में दहेज उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में अदालत ने पति, सास और देवर को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने दहेज की मांग को लेकर महिला के साथ क्रूरता की और विवाद के बाद उसे दूसरी मंजिल की बालकनी से नीचे फेंक दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई और कमर के नीचे से हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गई।
घटना का विवरण
पुलिस के अनुसार, दोषियों की पहचान आमिर खान, उसकी मां नसरीन और उसके भाई सोनू उर्फ फिरोज के रूप में हुई है। यह मामला फरवरी 2022 का है, जब पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसके पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्य दहेज को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित करते थे।
पुलिस जांच और साक्ष्य
पीड़िता की शिकायत के आधार पर कालिंदी कुंज थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 498ए, 342 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि 14 फरवरी 2022 को दहेज की मांग को लेकर परिवार में विवाद हुआ था, जिसके बाद आरोपियों ने महिला को बालकनी से फेंक दिया।
अदालत का फैसला
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। सत्र न्यायालय ने आमिर खान, सोनू उर्फ फिरोज और नसरीन को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 34 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि महिला को ऐसी चोटें लगी हैं, जिन्होंने उसका पूरा जीवन बदल दिया है।
मुआवजे का आदेश
अदालत ने तीनों दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उन पर जुर्माना भी लगाया। इसके साथ ही, पीड़िता को विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम के तहत मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया। यह फैसला दहेज उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।











