दिल्ली जिमखाना क्लब का भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला
नई दिल्ली के प्रतिष्ठित और सदियों पुराना दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार ने 5 जून 2026 तक खाली करने का आदेश जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि यह 27 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ क्लब राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा ढांचे और आवश्यक जनहित के कारण अपने कब्जे से मुक्त किया जाना चाहिए। यह क्लब प्रधानमंत्री आवास से बहुत ही नजदीक स्थित है, जो इसकी सुरक्षा और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
इतिहास और सुरक्षा से जुड़ी जटिलताएँ
यह क्लब लगभग सौ तीस वर्षों से दिल्ली की सामाजिक और खेल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसमें शानदार लॉन, दर्जनों टेनिस कोर्ट, एक स्विमिंग पूल, लकड़ी के फर्श वाला बॉलरूम और कई अन्य सुविधाएँ मौजूद हैं। पचास साल पहले यह स्थान भारतीय सेना के गुप्त रहस्यों के लीक होने का भी केंद्र था। इस घटना का विस्तृत विवरण 2002 में प्रकाशित CIA (Central Intelligence Agency) के पूर्व एजेंट रॉबर्ट बेयर की आत्मकथा ‘See No Evil’ में मौजूद है। उस समय यह क्लब जासूसों का मिलन स्थल था, जहां विदेशी राजनयिकों और भारतीय अधिकारियों के बीच गोपनीय संपर्क होते थे।
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बेदखली का निर्णय
केंद्र सरकार का तर्क है कि इस ऐतिहासिक क्लब को खाली कराना राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इस स्थान का उपयोग खुफिया गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इस निर्णय के पीछे का मुख्य कारण यह है कि यह स्थल सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है और इसे रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इस फैसले को लेकर कई सामाजिक और राजनीतिक सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि यह क्लब दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहा है।











