मुख्य बातें
- 85 वर्षीय दीप राय को 1992 के जानलेवा हमले के मामले में जमानत मिली।
- कोर्ट ने उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राहत दी।
- दीप राय को हाजीपुर जेल से रिहा किया गया।
- इस मामले में 35 साल बाद फैसला आया, जिसमें चार आरोपी की मौत हो चुकी है।
बिहार के वैशाली जिले में 1992 के एक जानलेवा हमले के मामले में 85 वर्षीय दीप राय को जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उनकी उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उन्हें राहत दी, जिसके बाद वे हाजीपुर जेल से रिहा हो गए। यह मामला 35 साल पुराना है और इसमें एक ही परिवार के पांच लोगों को दोषी ठहराया गया था।
मामले का विवरण
यह मामला 10 मई 1992 को शुरू हुआ, जब राघोपुर क्षेत्र में एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ घर के दरवाजे पर बैठा था। तभी एक ही परिवार के पांच लोग वहां पहुंचे और विवाद के दौरान उन पर जानलेवा हमला किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हमलावर हथियारों से लैस थे और उन्होंने फायरिंग की।
जांच और सुनवाई
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और 1993 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की। हालांकि, न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि फैसला आने में तीन दशक से अधिक का समय लग गया। इस दौरान, केस में नामजद चार आरोपियों की मौत हो गई, और अंततः केवल दीप राय ही जीवित बचे।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दीप राय को दंगा, घातक हथियार के साथ हमला और हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराओं के तहत दोषी करार दिया। हाल ही में, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत की अर्जी दी गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
दीप राय की रिहाई
जमानत मिलने के बाद, दीप राय आज बुधवार को हाजीपुर जेल से बाहर निकले। यह मामला न केवल एक बुजुर्ग दोषी के लिए राहत लेकर आया, बल्कि 35 साल पुराने मामले में न्याय की एक नई परिभाषा भी प्रस्तुत करता है।












