मुख्य बातें
- राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी आवास को निजी संपत्ति नहीं मानने की बात कही।
- राजद ने सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास का क्षेत्रफल बढ़ाया।
- सरकारी आवासों के आवंटन में दोहरे मानदंडों का आरोप भी लगाया गया है।
बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हालिया बयान ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज कर दिया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी आवास किसी की ‘बपौती’ नहीं है और इसे पद छोड़ने के बाद खाली करना चाहिए।
मुख्यमंत्री का बयान
सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकारी बंगले को निजी संपत्ति की तरह नहीं देखा जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने पद छोड़ने के बाद बिना किसी नोटिस के सरकारी आवास खाली कर दिया था। चौधरी ने कहा, “यह लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं। कुछ लोगों को सरकारी बंगलों से इतना लगाव है कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग आवास चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टी और नेतृत्व उन्हें बताएगा कि उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई है, तो वह 24 घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली कर देंगे।
राबड़ी देवी का कड़ा रुख
इस बीच, राबड़ी देवी ने सरकारी आवास खाली करने के आदेश पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वह स्वेच्छा से बंगला खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार चाहती है, तो उन्हें जबरन हटाकर आवास खाली करा सकती है।
राजद का आरोप
राबड़ी देवी के बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मुख्यमंत्री और एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। राजद ने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास परिसर का विस्तार कराया और कई सरकारी बंगलों को इसमें मिला दिया। पार्टी का दावा है कि इससे मुख्यमंत्री आवास का क्षेत्रफल लगभग 15 एकड़ हो गया है।
सरकारी आवासों के आवंटन पर सवाल
राजद ने सवाल उठाया कि बिहार के मुख्यमंत्री को रहने और कार्यालय संचालन के लिए इतनी बड़ी भूमि की आवश्यकता क्यों है। इसके अलावा, विपक्ष ने एनडीए सरकार पर सरकारी आवासों के आवंटन में दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। राजद ने कई नेताओं के नाम गिनाए, जो सरकारी बंगलों में रह रहे हैं, जबकि वे इसके लिए पात्र नहीं हैं।
राजद ने राबड़ी देवी के खिलाफ कार्रवाई को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है। पार्टी का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को भी वही सुविधाएं मिलनी चाहिए जो अन्य वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को दी जाती हैं। फिलहाल, बिहार सरकार ने राजद के आरोपों पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया है। यह विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है, और आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।












