मुख्य बातें
- मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेज हुई।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से सुझाव देने की अपील की।
- रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया।
- UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है।
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को एक वीडियो जारी कर प्रदेशवासियों से सुझाव देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है और सभी धर्मों के लोगों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री का वीडियो संदेश
वीडियो में, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि “हमारी बहनों की शादियों और पारिवारिक परंपराओं के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ की आवश्यकता अब नहीं है।” उन्होंने UCC की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड, गुजरात और असम में इसे अपनाने से प्रेरित होकर मध्य प्रदेश सरकार इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सुझावों के लिए वेबसाइट लॉन्च
सीएम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई है, जो सभी जिलों में लोगों से सुझाव इकट्ठा करेगी। इसके लिए एक वेबसाइट भी लॉन्च की गई है, जहां लोग अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकते हैं।
कमेटी का गठन
28 अप्रैल को रिटायर्ड जज रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, कानूनविद अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता बुधपाल सिंह और सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया शामिल हैं। यह 6 सदस्यीय कमेटी 60 दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी।
UCC का महत्व
समान नागरिक संहिता (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, संपत्ति, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव को समाप्त करना है। यह कानून लिव इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाता है और बहुविवाह पर रोक लगाता है। इसके साथ ही, यह भारतीय पुरुष सत्तात्मक समाज में महिलाओं को समान अधिकार भी प्रदान करता है।












