मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति में लगी महिलाओं के पुनर्वास पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
- महिलाओं की स्वेच्छा को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास केंद्र में भेजने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
- बाल यौन शोषण के मामलों में बच्चों के पुनर्वास के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए।
- कोर्ट ने कहा कि बच्चों के पुनर्वास की योजना पहले दिन से लागू होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं के पुनर्वास के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा है कि वेश्यावृत्ति में संलग्न हर वयस्क महिला को मजबूर मानकर उसे पुनर्वास केंद्र में भेजना गलत है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि कई महिलाएं स्वेच्छा से इस पेशे में हैं।
महिलाओं की स्वेच्छा का महत्व
कोर्ट ने मौजूदा कानूनी व्यवस्था को अव्यावहारिक और पुरुषवादी सोच से ग्रस्त बताया। इसमें वेश्यावृत्ति के अड्डों पर छापे मारकर हर महिला को अनैतिक देह व्यापार रोकथाम कानून के तहत अनिवार्य रूप से पुनर्वास केंद्र में भेजा जाता है। बेंच ने कहा कि यदि कोई महिला स्थायी संरक्षण या पुनर्वास केंद्र में दाखिल नहीं होना चाहती, तो उसे जाने दिया जाना चाहिए।
कोर्ट का निर्देश
जस्टिस पारदीवाला और महादेवन ने कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने पर यह प्राथमिकता होनी चाहिए कि आरोपी बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति कर रही है या नहीं। इस सवाल के जवाब और उसकी इच्छा के आधार पर ही उसे पुनर्वास केंद्र में भेजा जा सकता है। यह विषय महिला के जीवन, स्वतंत्रता और भविष्य से जुड़ा है, इसलिए उसकी इच्छा की अनदेखी नहीं की जा सकती।
बाल यौन शोषण के मामलों में दिशा-निर्देश
बेंच ने बाल यौन शोषण के मामलों में बच्चों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए। इसके तहत हर प्रभावित बच्चे की व्यक्तिगत पुनर्वास योजना बनाई जाएगी, जो केस तय होने के बजाय पहले दिन से लागू होगी। बच्चों के मामलों में कार्रवाई किशोर न्याय कानून और बाल कल्याण समिति के माध्यम से की जाएगी।
पुनर्वास की प्रक्रिया
कोर्ट ने कहा कि हर पीड़ित बच्चे को पुनर्वास और देखभाल योग्य माना जाएगा। बच्चे को तत्काल बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा, और उसकी मेडिकल व सामाजिक जांच की जाएगी। बाल गृह में भेजना अंतिम विकल्प होगा, और प्राथमिकता घर या रिश्तेदारों को संभालने की दी जाएगी। शिक्षा, काउंसिलिंग, कानूनी सहायता और कौशल प्रशिक्षण अनिवार्य पुनर्वास में शामिल होंगे।












