मुख्य बातें
- कटिहार के मोरसंडा गांव में ग्रामीणों को शव को अंतिम संस्कार के लिए नदी पार करनी पड़ रही है।
- बरंडी नदी पर पुल न होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ता है।
- स्थानीय विधायक ने पुल निर्माण का आश्वासन दिया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस समस्या को उजागर किया है।
बिहार के कटिहार जिले के मोरसंडा गांव में एक गंभीर समस्या सामने आई है, जहां ग्रामीणों को अपने प्रियजनों के शव को अंतिम संस्कार के लिए उफनती बरंडी नदी पार करनी पड़ रही है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब नदी पर पुल का अभाव होता है, जिससे ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो स्थानीय प्रशासन की विफलता को उजागर करता है।
पुल की अनुपस्थिति का प्रभाव
बरंडी नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि यह तीन पंचायतों के कई गांवों के लिए जीवनरेखा है। प्रखंड मुख्यालय फलका जाने के लिए यह नदी मात्र 4 किलोमीटर का सबसे छोटा रास्ता है, लेकिन पुल न होने के कारण ग्रामीणों को 12 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। हर साल बाढ़ के दौरान, ग्रामीण अपने निजी कोष से चंदा इकट्ठा कर बांस का अस्थाई ‘चचरी पुल’ बनाते हैं, जो पानी के तेज बहाव में टिक नहीं पाता।
घटना का विवरण
हाल ही में मोरसंडा पंचायत के 50 वर्षीय अरविंद महलदार का निधन हो गया। उनके परिजन और ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए ‘कमला घाट श्मशान’ ले जा रहे थे। पुल के अभाव में, दर्जनों ग्रामीणों को शव की अर्थी को अपने कंधों पर उठाकर नदी के गहरे पानी के बीच से गुजरना पड़ा। वीडियो में साफ दिख रहा है कि लोग अत्यंत सावधानी से पानी में चल रहे हैं, जबकि कोई भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई थी।
स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया
स्थानीय जनप्रतिनिधि मनोज ने कहा, “हमारे दादा और पिता जी इसी आस में गुजर गए। मेरी उम्र 40 साल हो गई है, लेकिन अब हम लोग अपने जीवनकाल में यहां पुल देख पाएंगे या नहीं, भगवान जाने।” वहीं, विधायक कविता देवी ने कहा कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विधानसभा में इस पुल का सवाल उठाया है और आश्वासन दिया कि वह पुल बनवाकर ही रहेंगी।
समस्या का समाधान
स्थानीय विधायक ने कहा, “मैंने दो बार इस पुल का सवाल उठाया है। विभाग के अधिकारियों द्वारा गलत रिपोर्ट के कारण काम स्वीकृत नहीं हो पा रहा था। लेकिन अब मुझे आश्वासन मिला है कि वह पुल जरूर बनेगा।” हालांकि, अभी तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, और ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है।












