मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने कछुआ तस्कर मुनीव्रम मुरुगेसन की जमानत याचिका खारिज की।
- मुरुगेसन को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित किया गया था।
- STAF ने आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत पेश किए थे।
- मुरुगेसन पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था।
मध्य प्रदेश वन विभाग और राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STAF) को वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कछुआ तस्कर मुनीव्रम मुरुगेसन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। मुरुगेसन को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित किया गया था और वह वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
जमानत याचिका का खारिज होना
मुनीव्रम मुरुगेसन ने जेल से बाहर आने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। अदालत ने इस याचिका को खारिज करते हुए आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता और वन्यजीवों को हुए नुकसान का ध्यान रखा। इसके अलावा, प्रत्यर्पण प्रक्रिया के कानूनी पहलुओं की भी गहन समीक्षा की गई।
STAF की भूमिका
मध्य प्रदेश की STAF ने भारत सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से मुरुगेसन के खिलाफ सभी आवश्यक डिजिटल, दस्तावेजी और वैज्ञानिक सबूत अदालत में पेश किए। इन सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी का मामला
मुनीव्रम मुरुगेसन कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह भारत सहित कई एशियाई देशों में दुर्लभ प्रजातियों के कछुओं की तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा है। उसकी गतिविधियों को देखते हुए इंटरपोल ने उसके खिलाफ ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ जारी किया था।
पिछले मामलों की जानकारी
मुरुगेसन को 2018 में मध्य प्रदेश वन विभाग और STAF की संयुक्त टीम द्वारा गिरफ्तार किया गया था। तब से उसके खिलाफ विभिन्न अदालतों में कानूनी कार्यवाही जारी है। इस मामले में आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।












