गिरनार जंगल में शेरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग का सक्रिय कदम
गुजरात के गिरनार (Girnar) वन क्षेत्र में शेरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। डीसीएफ (District Conservator of Forests) ने बताया कि गिर क्षेत्र में किसी भी तरह के संक्रमण या बीमारी के संकेत न मिलने के बावजूद, सतर्कता बरती जा रही है। इस क्षेत्र में शेरों और उनके शावकों की लगातार जांच की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत पता चल सके।
गिरनार अभयारण्य में वर्तमान में कुल 54 शेर पाए गए हैं, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पिछले एक सप्ताह में 41 शेरों और शावकों का ‘डी-टिकिंग’ और ‘डी-वॉर्मिंग’ किया गया है। वन विभाग के ट्रैकर्स, गार्ड्स और फॉरेस्टर को 24 घंटे शेरों के स्वास्थ्य पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी शेर में लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत उसका रेस्क्यू कर उपचार शुरू किया जाएगा।
बिमारियों से बचाव के लिए उठाए गए कदम और निगरानी व्यवस्था
गिरनार में संक्रामक वायरस जैसे बेबेसिया (Babesia) और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के कारण पहले ही सात शेरों की मौत हो चुकी है, जबकि 17 शेरों को क्वारंटीन में रखा गया है। ये रोग वन्यजीवों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देते हैं, जिससे उनमें एनीमिया, आंख और नाक से पानी आना, बुखार जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। फिलहाल, इन लक्षणों के अभाव में वैक्सीनेशन अभियान शुरू नहीं किया गया है, बल्कि सामान्य ‘डी-टिकिंग’ और ‘डी-वॉर्मिंग’ ही की जा रही है।
गिरनार सेंचुरी का क्षेत्रफल लगभग 178 वर्ग किलोमीटर है, जहां शेरों की सुरक्षा का दावा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में शेरों की आबादी सुरक्षित है और किसी भी तरह की गंभीर बीमारी का खतरा नहीं है। वन विभाग ने संक्रमण से बचाव के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित की है, जो निरंतर निगरानी कर रही है।
शेरों की स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण से बचाव के उपाय
डॉक्टर जलपन रूपापरा के अनुसार, बेबेसिया एक सामान्य टिक (Tick) संक्रमण है, जो मलेरिया जैसी बीमारी का रूप ले सकता है। यह कीट गाय, भैंस, कुत्तों और पक्षियों का खून चूसकर जीवित रहता है। वहीं, CDV हवा के माध्यम से फैलने वाला वायरस है, जिसकी अभी तक कोई विशेष दवा नहीं मिली है। वर्तमान में, शेरों में बाबेसिया के लक्षण पाए गए हैं, और उनका इलाज किया जा रहा है। इलाज के बाद उन्हें फिर से जंगल में छोड़ा जाएगा।
शेरों की आबादी में वृद्धि को देखते हुए, मौजूदा मौतों को सामान्य माना जा रहा है। वन विभाग ने संक्रमण से बचाव के लिए सतर्कता बरतते हुए, विशेषज्ञों की टीम के साथ लगातार निगरानी जारी रखी है। साथ ही, संक्रमण के किसी भी संकेत पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।












