सूरत पुलिस ने नकली CBI अधिकारी बनकर ठगने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार
सूरत की क्राइम ब्रांच ने कर्नाटक की एक बुजुर्ग महिला को धोखे से फंसाने वाले मुख्य आरोपी जिग्नेश उर्फ जितो मिस्त्री को हिरासत में लिया है। आरोपी ने महिला को वीडियो कॉल के माध्यम से नकली पुलिस और CBI कार्यालय का सेटअप दिखाकर डराया और उससे 1.34 करोड़ रुपये की ठगी की। इस जालसाजी में आरोपी ने महिला को धमकी दी कि उसके खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है और उसे घर से बाहर न निकलने का निर्देश दिया।
कैसे किया गया था महिला को डराने का प्रयास
पीड़ित महिला के व्हाट्सएप नंबर पर एक अज्ञात कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को नई दिल्ली (Delhi) के ट्राई (TRAI) का वरिष्ठ अधिकारी विजय शर्मा बताया। उसने कहा कि महिला के फोन नंबर का दुरुपयोग अवैध गतिविधियों में हो रहा है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद साइबर अपराधियों ने महिला को डराने के लिए नकली पुलिस स्टेशन और सरकारी कार्यालय का सेटअप तैयार किया। वीडियो कॉल के दौरान एक व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस के अधिकारी प्रदीप सिंह और दूसरे ने खुद को CBI के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया।
धोखाधड़ी का खुलासा और गिरफ्तारी
आरोपियों ने महिला पर झूठे आरोप लगाए कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी बैंक खातों और मानव तस्करी जैसे अपराधों में किया गया है। उन्होंने महिला को गोपनीयता बनाए रखने और घर से बाहर न निकलने का दबाव डाला। इसके बाद महिला को व्हाट्सएप पर नकली CBI नोटिस और लेटरहेड भेजे गए। आरोपियों ने यह भी कहा कि RBI (Reserve Bank of India) उनके बैंक खातों की जांच करेगा और जांच पूरी होने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। इन सबके चलते महिला ने तीन अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.34 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
आरोपी की गिरफ्तारी और साइबर सुरक्षा का संदेश
मामले का खुलासा होने के बाद कर्नाटक के कोलार (Kolar) साइबर पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। सूरत पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मुखबिर की सूचना पर जाल बिछाकर आरोपी जिग्नेश उर्फ जितो मिस्त्री को अमरोली (Amroli) के न्यू कोसाड रोड से गिरफ्तार कर लिया। अब उसे कर्नाटक की कोलार साइबर क्राइम पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे CBI, ED या पुलिस कभी भी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ऐसे संदिग्ध कॉल मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।












