भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की रूस में महत्वपूर्ण बैठकें
मॉस्को में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया है। इस कार्यक्रम का आयोजन रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सारगाई शोइगू की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें विश्व के सुरक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस मंच पर बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था और मल्टीपोलर वर्ल्ड के विषय पर चर्चा हुई, जिसमें भारत ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया।
डोभाल ने आतंकवाद को लेकर कहा कि इस मुद्दे पर दोहरे मानकों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिम्मेदार देशों को यह तय करना चाहिए कि वे आतंकवाद का समर्थन करने वालों के साथ खड़े हैं या फिर उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेंगे। यह वक्त की मांग है कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाए जाएं, क्योंकि वर्तमान में प्रॉक्सी युद्ध और आतंकवाद विश्व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
वैश्विक सुरक्षा सुधार और विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व
डोभाल ने अपने भाषण में कहा कि 1945 में स्थापित वैश्विक संस्थाओं और संरचनाओं में अब व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान संस्थाएं आज की जटिल चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं। इस संदर्भ में उन्होंने विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने और उनकी आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने पर जोर दिया। यह भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा है, जो खुद को एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति और विकासशील देशों की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित कर रहा है।
इसके अलावा, अजीत डोभाल ने स्टेट ऑफ हार्मोनस और रेड सी की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को अत्यंत आवश्यक बताया, ताकि व्यापारिक आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सके। इस संदर्भ में उन्होंने भारत का स्टैंड स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा भारत के राष्ट्रीय हितों में है।
भारत-रूस साझेदारी और यूरोपीय नेताओं से मुलाकात
मॉस्को में डोभाल ने रूस के साथ अपनी साझेदारी की भी प्रशंसा की और रक्षा परिषद के सचिव शोगोई के साथ द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने व्यापक रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।
वहीं, दूसरी ओर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर साइपरस (Cyprus) के शहर लीमासोल में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों के साथ अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए। यह बैठक केवल औपचारिक कूटनीति का मंच नहीं थी, बल्कि नई वैश्विक चुनौतियों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का अवसर भी थी। यूरोप ने महसूस किया है कि सिर्फ अमेरिका के साथ ही नहीं, बल्कि अपने स्वतंत्र और मजबूत संबंधों के लिए यूरोप को भी नई दिशा में कदम उठाने होंगे।












