मुख्य बातें
- नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत पर जमीन अतिक्रमण का आरोप लगाया।
- इस बयान के बाद नेपाल में राजनीतिक हंगामा मच गया है।
- नेपाल सरकार ने बालेन शाह के बयान पर सफाई दी है।
- भारत-नेपाल सीमा विवाद का इतिहास 200 साल पुराना है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में संसद में एक विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने भारत पर नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया। इस बयान ने नेपाल में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जिसके बाद सरकार को सफाई देने की आवश्यकता पड़ी। यह मामला भारत और नेपाल के बीच 200 साल पुरानी सीमा विवाद की पृष्ठभूमि में उभरा है, जो आज भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का कारण बना हुआ है।
बालेन शाह का विवादास्पद बयान
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया, बल्कि नेपाल ने भी कुछ स्थानों पर भारतीय जमीन पर कब्जा किया है। उनके इस बयान के बाद नेपाल में विपक्ष ने सबूत मांगना शुरू कर दिया। पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ने इस दावे पर सवाल उठाए, जबकि पूर्व राजदूतों ने इसे खारिज कर दिया।
नेपाल सरकार की सफाई
इस विवाद के बढ़ने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि बालेन शाह का मतलब भारत की जमीन पर नेपाल के आधिकारिक कब्जे से नहीं था। उन्होंने 10 गजा की बात की, जो सीमा पर स्थित नो मैनस लैंड है, जहां कुछ लोग खेती कर रहे हैं और मकान बना चुके हैं।
इतिहास में झलक
इस विवाद की जड़ें 1816 की सुगोली संधि तक जाती हैं, जब नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच सीमा तय की गई थी। काली नदी के रास्ते में बदलाव के कारण विवाद उत्पन्न हुआ, जिससे काला पानी, लिपुलेख और सुस्ता जैसे क्षेत्रों पर दावे किए गए। नेपाल का कहना है कि काली नदी का वास्तविक स्रोत उसके क्षेत्र में है, जबकि भारत इसे अपने अधिकार क्षेत्र का हिस्सा मानता है।
भारत का रुख
2020 में नेपाल ने एक नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें विवादित क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया। भारत ने इस कदम को एकतरफा कार्रवाई बताया। हाल के वर्षों में लिपुलेख को लेकर विवाद और बढ़ा है, लेकिन भारत ने बालेन शाह के बयान पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस मुद्दे को कूटनीतिक विवाद बनाने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
सीमा विवाद का वर्तमान स्थिति
भारत और नेपाल की सीमा लगभग 1880 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से 97% पहले से तय और स्वीकार की जा चुकी है। विवाद केवल कुछ छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लेकर है। यह सवाल अब भी बना हुआ है कि यदि 97% सीमा विवाद सुलझ चुकी है, तो बाकी 3% में ऐसा क्या है जो दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा कर रहा है।












