मुख्य बातें
- केन्या के नानयुकी में इबोला के खिलाफ प्रदर्शन हुआ।
- उच्च न्यायालय ने पृथकवास केंद्र की स्थापना पर रोक लगाई।
- स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, यह केंद्र सभी के लिए है।
- अमेरिका ने केन्या को इबोला से निपटने के लिए सहायता देने का प्रस्ताव रखा।
केन्या के नानयुकी कस्बे में सोमवार को हजारों युवाओं ने इबोला वायरस संक्रमण से प्रभावित अमेरिकी नागरिकों के लिए लाइकीपिया वायुसैनिक अड्डे पर पृथकवास केंद्र की स्थापना के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह विरोध तब हुआ जब केन्या के उच्च न्यायालय ने दो दिन पहले इस केंद्र की स्थापना पर रोक लगा दी थी, साथ ही विदेशी मरीजों के आगमन पर भी रोक लगाई थी।
प्रदर्शन का कारण
लॉ सोसायटी ऑफ केन्या और एक संवैधानिक निगरानी संस्था ने इबोला से संक्रमित विदेशी नागरिकों को केन्या में पृथकवास में रखने का विरोध किया है। उनका कहना है कि देश की स्वास्थ्य प्रणाली बेहद कमजोर है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वाशिंगटन इबोला से प्रभावित नागरिकों को स्वदेश लाने के बजाय केन्या में पृथकवास केंद्र में भेजने की योजना बना रहा है।
पृथकवास केंद्र की जानकारी
लाइकीपिया वायुसैनिक अड्डे पर स्थापित इस केंद्र में 50 बिस्तर होंगे और यह शुक्रवार से मरीजों के लिए उपलब्ध होने की योजना है। स्वास्थ्य मंत्री एडेन डुएल ने रविवार को स्पष्ट किया कि यह केंद्र केवल अमेरिकी नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए है।
अमेरिका की सहायता
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन का इरादा इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए केन्या को 1.35 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता देने का है। यह सहायता केन्या की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में मदद कर सकती है।
इस स्थिति ने न केवल स्थानीय युवाओं में चिंता पैदा की है, बल्कि स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए भी एक चुनौती पेश की है।












