अमेरिकी रक्षा मंत्री का चेतावनी भरा बयान
ईरान के साथ संभावित समझौते पर बातचीत में अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलने के कारण, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को स्पष्ट किया कि यदि परिस्थितियां अनुकूल हुईं, तो वाशिंगटन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद में अपने भाषण के दौरान, उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास एक साथ कई क्षेत्रों में सैन्य अभियान चलाने की क्षमता और हथियारों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि आवश्यक हुआ, तो पुनः सैन्य कदम उठाने की हमारी क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि हम इसके लिए पूरी तरह से सक्षम हैं, हमारे पास पर्याप्त संसाधन हैं, चाहे वह मध्य पूर्व हो या विश्व के अन्य हिस्से, क्योंकि हम अपने गोला-बारूद का संतुलित और प्रचुर भंडार रखते हैं। महीनों से चल रहे मध्य पूर्व के संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच, वाशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित राजनयिक समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच हेगसेथ ने ये बातें कहीं।
ईरान के परमाणु हथियारों का विरोध और क्षेत्रीय रणनीति
हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का पुराना रुख है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी जिम्मेदारी है कि ईरान को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोका जाए।” यह बयान उस समय आया है जब तेहरान के साथ चल रही बातचीत जारी है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका का उद्देश्य है कि ईरान को परमाणु हथियार से दूर रखा जाए, क्योंकि यह क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए जरूरी है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी रणनीति और सहयोगी जिम्मेदारी
हेगसेथ ने अपने भाषण में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, अमेरिका इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और शक्ति का संतुलन कायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि एक ऐसा स्थिर और संतुलित शक्ति संतुलन जरूरी है, जो न केवल अमेरिका बल्कि उसके सहयोगियों के लिए भी लाभकारी हो। इस संतुलन का उद्देश्य है कि कोई भी देश वर्चस्व स्थापित न कर सके और न ही हमारे राष्ट्र और सहयोगियों की सुरक्षा या समृद्धि को खतरा पहुंचे। साथ ही, हेगसेथ ने संकेत दिया कि अमेरिका को उम्मीद है कि भविष्य में उसके सहयोगी देश सुरक्षा जिम्मेदारियों का अधिक हिस्सा संभालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिका पर निर्भरता कम हो रही है और धनी देशों को सब्सिडी देने का दौर समाप्त हो रहा है। उनका मानना है कि दीर्घकालिक स्थिरता और समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर किसी एक शक्ति का वर्चस्व न हो। अमेरिका इस क्षेत्र को स्वतंत्र और खुले रूप में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।












