मुख्य बातें
- पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत की अग्नि-6 मिसाइल पर सवाल उठाया।
- अमेरिकी रक्षा सचिव ने भारत की मिसाइल प्रगति को सकारात्मक बताया।
- भारत को जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
- पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं पर उठे सवाल, भारत की शक्ति को मान्यता।
हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी पत्रकार तंजीला खलील और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हुई चर्चा ने दक्षिण एशिया की भू राजनीति में एक नया मोड़ दिया है। इस संवाद में पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं के साथ-साथ भारत की अग्नि-6 मिसाइल पर भी तीखे सवाल उठाए गए, जो वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकते हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का मुख्य मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में तंजीला खलील ने राष्ट्रीय खुफिया निर्देशक तुलसी गबाट के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान की संभावित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीवीएम) क्षमता को अमेरिका के लिए खतरा बताया गया था। उन्होंने भारत की अग्नि-6 मिसाइल को निशाने पर लेते हुए सवाल किया, जो पाकिस्तान की बढ़ती चिंताओं को दर्शाता है।
अमेरिका का जवाब
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका देशों के द्वारा अपनी सुरक्षा के लिए मिसाइल विकसित करने के अधिकार को मानता है। उन्होंने भारत की प्रगति को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सकारात्मक बताया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका भारत की सैन्य शक्ति को एक खतरे के रूप में नहीं देखता।
भारत की स्थिति
इस संवाद से यह स्पष्ट हो गया कि दुनिया अब भारत को एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति और नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में देखती है। जहां पाकिस्तान की मिसाइल क्षमताओं पर सवाल उठते हैं, वहीं भारत की अग्नि-6 मिसाइल को क्षेत्रीय संतुलन के लिए आवश्यक माना जाता है।
भविष्य की संभावनाएं
पीट हेगसेथ का जवाब न केवल भारत के लिए सम्मानजनक था, बल्कि यह उन ताकतों को भी एक कड़ा संदेश था जो भारत की सैन्य शक्ति को गलत तरीके से पेश करना चाहती हैं। इस प्रकार, भारत की अग्नि-6 मिसाइल की मारक क्षमता उसे वैश्विक शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करती है, जो अमेरिका के लिए चिंता का विषय नहीं, बल्कि एक मजबूत साझेदार की ताकत है।












