मुख्य बातें
- उत्तरकाशी में लापता बबीता पांडे की तलाश जारी है, प्रशासन सक्रिय है।
- परिवार ने प्रशासन से बेटी की सुरक्षित वापसी की अपील की है।
- बबीता 29 मई को ट्रैकिंग के लिए गई थीं, 30 मई को लापता हुईं।
- सर्च ऑपरेशन में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें शामिल हैं।
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता 24 वर्षीय बबीता पांडे की खोजबीन का अभियान लगातार जारी है। प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें पिछले कई दिनों से दुर्गम पहाड़ियों और जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। बबीता के परिवार का दर्द हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है, और वे उसकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।
परिवार की चिंता
बबीता के पिता, गोपाल पांडे, ने भावुक होकर कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि उनकी बेटी सकुशल घर लौट आए। उन्होंने बताया कि बबीता पढ़ाई में मेधावी हैं और वर्तमान में एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं। इसके साथ ही, वह पार्ट-टाइम नौकरी भी करती हैं। गोपाल पांडे ने कहा कि करीब पांच वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और तब से चल-फिर नहीं पाते।
बुजुर्ग दादी की अपील
बबीता की दादी, लक्ष्मी पांडे, ने प्रशासन से अपील की कि किसी भी तरह उनकी पोती को सुरक्षित बरामद किया जाए। उन्होंने कहा कि चार से पांच दिन बीत जाने के बावजूद अब तक बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिवार की चिंता और बेचैनी बढ़ती जा रही है, और वे हर पल उसकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।
सर्च ऑपरेशन की जानकारी
गौरतलब है कि बबीता 29 मई को अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं और गोई नामक स्थान पर रुकी थीं। 30 मई को ट्रेकिंग के दौरान वह अचानक लापता हो गईं। सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने तुरंत खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और वन विभाग की टीमें डॉग स्क्वॉड तथा ड्रोन की मदद से लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। पुलिस ने कोतवाली मनेरी में धारा 140(3) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें
पूरे रामनगर और उत्तराखंड की निगाहें इस सर्च अभियान पर टिकी हैं। परिवार, रिश्तेदार और स्थानीय लोग बबीता की सकुशल वापसी के लिए दुआ कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही कोई अच्छी खबर मिलेगी।












