मुख्य बातें
- पंजाब सरकार ने ठेकेदारी प्रथा खत्म कर 65,000 कर्मचारियों को पक्का किया।
- अरविंद केजरीवाल ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया, जो देश में पहली बार हुआ।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी कर्मचारियों को सीधे सरकार द्वारा नियोजित करने की बात कही।
- भ्रष्टाचार के मामलों के शीघ्र निपटान के लिए 7 नए विशेष न्यायालयों का गठन किया गया।
पंजाब में भगवंत मान सरकार ने ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करते हुए 65,000 कच्चे और आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी करने का निर्णय लिया है। यह ऐतिहासिक कदम देश में पहली बार उठाया गया है, जिससे कर्मचारियों को सीधे सरकार द्वारा नियोजित किया जाएगा। इस फैसले का स्वागत आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं ने किया है।
सरकार का ऐतिहासिक निर्णय
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में इस निर्णय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब कोई बिचौलिए या ठेकेदार नहीं होंगे, और सभी कर्मचारी सीधे सरकार के अधीन काम करेंगे। इसके साथ ही, कर्मचारियों को बैंक खाते में सैलरी, पीएफ, ईएसआई, और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी।
कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद
अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले को लेकर कहा कि यह केवल एक निर्णय नहीं, बल्कि इन परिवारों के लिए नई ज़िंदगी की शुरुआत है। उन्होंने सभी कर्मचारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए सराहा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अग्निशामक, सीवर कर्मचारी और लाइनमैन जैसे जोखिम भरे कामों में लगे कर्मचारियों को 3 साल की सेवा के बाद स्थायी किया जाएगा। इसके अलावा, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया और महंगाई भत्ते के मुद्दों को हल करने के लिए एक विशेष कैबिनेट उप-समिति का गठन किया गया है।
विशेष न्यायालयों का गठन
भ्रष्टाचार के मामलों के शीघ्र निपटान के लिए पंजाब में 7 नए विशेष न्यायालयों के गठन को भी मंजूरी दी गई है। आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह लाखों लोगों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आया है।












