मुख्य बातें
- पुरी के जगन्नाथ मंदिर में ‘बनकलागी’ अनुष्ठान के कारण दर्शन बंद रहेंगे।
- विशेष अनुष्ठान शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा।
- भगवान के विग्रहों को प्राकृतिक रंगों से सजाया जाएगा।
- अनुष्ठान के दौरान केवल सेवायतों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति होगी।
ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में आज शाम श्रद्धालुओं के लिए चार घंटे तक भगवान के दर्शन नहीं होंगे। मंदिर प्रशासन ने बताया कि विशेष धार्मिक अनुष्ठान ‘बनकलागी’ के चलते यह व्यवस्था लागू की गई है। यह अनुष्ठान शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के चेहरे को नए सिरे से सजाया जाएगा।
बनकलागी अनुष्ठान का महत्व
‘बनकलागी’ को ‘श्रीमुख श्रृंगार’ भी कहा जाता है। इस अनुष्ठान में भगवान के विग्रहों के मुखमंडल पर लगे रंगों को फिर से ताजा किया जाता है। समय के साथ ये रंग फीके पड़ जाते हैं, इसलिए इस विशेष सेवा के दौरान प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसमें किसी भी आधुनिक या रासायनिक रंग का इस्तेमाल नहीं होता।
सेवायतों की भूमिका
जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं के अनुसार, हर सेवा का अधिकार एक विशेष सेवायत समुदाय के पास होता है। ‘बनकलागी’ की जिम्मेदारी ‘दत्ता महापात्र’ सेवायतों की होती है। इस अनुष्ठान के दौरान गर्भगृह में केवल सेवायतों को ही प्रवेश की अनुमति होती है, जिससे आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहेंगे।
अनुष्ठान का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनुष्ठान भगवान की सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कस्तूरी, कपूर और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। रथ यात्रा के मौसम में इस तरह के विशेष अनुष्ठान का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इन परंपराओं में गहरी आस्था रखते हैं।
अनुष्ठान पूरा होने के बाद मंदिर के द्वार फिर से खोल दिए जाएंगे, जिससे श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे।











