महाराष्ट्र में प्याज संकट की गहरी जड़ें
महाराष्ट्र के नासिक, पुणे और आसपास के इलाकों में प्याज की खेती करने वाले किसानों को इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में प्याज की थोक मंडियों में कीमतें घटकर 50 पैसे से लेकर केवल 2 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। इस भारी गिरावट ने किसानों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि उन्हें न तो उत्पादन लागत वसूल हो रही है और न ही मंडी में प्याज बेचने का लाभ मिल रहा है।
प्याज की इस स्थिति के पीछे बेमौसम बारिश, भीषण गर्मी, निर्यात में कमी और सरकारी नीतियों में बार-बार बदलाव को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन मुद्दों को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। उनका उद्देश्य किसानों को राहत देने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग करना था।
केंद्र और राज्य सरकार की नई पहलें और निर्यात नीति
बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र की कई मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इनमें से एक प्रमुख मांग थी कि राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय कृषक सहकारी फाउंडेशन (NCCF) द्वारा प्याज की खरीद सीधे किसानों से की जाए, न कि व्यापारियों के माध्यम से।
इसके साथ ही, सरकार ने प्याज की खरीद के दौरान मैनुअल ग्रेडिंग की प्रक्रिया को खत्म करने का भी आश्वासन दिया है। फडणवीस ने कहा कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मनमानी अस्वीकृति को रोकने के लिए मशीन से ग्रेडिंग प्रणाली शुरू की जाएगी।
बिना सरचार्ज के निर्यात और लागत से नीचे कीमतें
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्याज के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा और न ही निर्यात पर कोई सरचार्ज लगेगा। पिछले वर्षों में निर्यात नीति में बार-बार बदलाव से व्यापारियों और किसानों में अनिश्चितता बनी रही, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी। सरकार ने यह भी मांग की है कि NAFED और NCCF द्वारा खरीदी जाने वाली प्याज की मात्रा को 2 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन किया जाए।
हालांकि, महाराष्ट्र में 26 मई 2026 से रबी प्याज की खरीद के लिए तय कीमत 1580 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद, कीमतें उत्पादन लागत से बहुत कम हैं। किसानों का कहना है कि खाद, कीटनाशक, मजदूरी और ट्रांसपोर्ट पर बढ़ते खर्च के कारण उत्पादन लागत 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जबकि बाजार में कीमतें 2 से 6 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर चुकी हैं। कुछ किसानों को तो केवल 50 पैसे प्रति किलोग्राम के दाम मिले हैं। इस स्थिति ने पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया है।












