महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज, BMC में बदलाव पर रोक
मध्यरात्रि के समय मुंबई के मातोश्री मुख्यालय से एक महत्वपूर्ण फोन कॉल सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के पास पहुंचता है, जिससे राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में तीव्रता आ जाती है। इस कॉल के पीछे मुख्य रूप से शिवसेना UBT (Shiv Sena UBT) के नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) का हाथ माना जा रहा है। उनके निर्देश पर शिवसेना UBT के एमएलसी मिलिंद नार्वेकर (Milind Narvekar) ने मुख्यमंत्री को कुछ जरूरी जानकारी दी, जिससे बीएमसी (BMC) में प्रस्तावित एक बड़े बदलाव को फिलहाल रोक दिया गया है।
शिंदे गुट की जमीनों पर कब्जे की कोशिश का आरोप
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया है कि इस बदलाव (डील) के माध्यम से शिंदे गुट (Shinde Camp) मुंबई की प्रमुख जमीनों पर कब्जा जमाने की योजना बना रहा है। देश की सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के भीतर हो रही इन सियासी घटनाओं में नाटकीय मोड़ देखने को मिल रहा है, जो एक बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर संकेत करता है। इस संदर्भ में कहा जा रहा है कि बीएमसी की सुधार समिति (Reform Committee) में शिंदे गुट की मजबूत उपस्थिति है, जो इन प्रस्तावों को मंजूरी देने में अहम भूमिका निभाती है।
मातोश्री से रातभर की हलचल और राजनीतिक समीकरण
मंगलवार को आदित्य ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि बीएमसी की सुधार समिति कुछ बदलावों के जरिये मुंबई की प्रीमियम जमीनों का दुरुपयोग करना चाहती है। उन्होंने सेवन हिल्स अस्पताल (Seven Hills Hospital) को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर देने का भी विरोध किया। इन प्रस्तावों में सेवेन हिल्स अस्पताल का निजीकरण, पांच उपनगरों के ब्लड बैंकों का निजीकरण, बांद्रा का पुनर्वास केंद्र और मालाबार हिल ग्रीन ज़ोन में बदलाव शामिल थे। शिवसेना UBT नेता ने इन मामलों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
रातभर की हलचल में मातोश्री से एक कॉल मुख्यमंत्री फडणवीस को जाता है, जिसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलने लगता है। शिवसेना UBT के एमएलसी मिलिंद नार्वेकर ने फडणवीस को इन प्रस्तावों में मौजूद गड़बड़ियों की जानकारी दी। फडणवीस ने तुरंत भाजपा (BJP) पार्षदों से रिपोर्ट मांगी और इन प्रस्तावों को तुरंत रोकने का आदेश दिया। दिलचस्प बात यह है कि शिंदे गुट के एक पार्षद ने भी ब्लड बैंक से जुड़े प्रस्ताव पर पुनर्विचार का समर्थन किया। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इस डील को रोकने में पर्दे के पीछे भूमिका निभाई।
इस सफल तालमेल ने एकनाथ शिंदे गुट को हाशिए पर डाल दिया है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में नए समीकरण बन रहे हैं। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में नई हलचल और चर्चाओं को जन्म दे रहा है।












