उत्तराखंड में ईद की नमाज को लेकर विवाद का राजनीतिक और कानूनी मोड़
उत्तराखंड के नैनीताल में बकरीद की नमाज को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे में बदल चुका है। सरोवर नगरी नैनीताल के ऐतिहासिक डीएसए फ्लैट मैदान में ईद की सामूहिक नमाज पर लगाए गए प्रतिबंध को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। न्यायालय ने अंजुमन ए इस्लामिया नैनीताल की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस स्थल पर नमाज की अनुमति प्रदान कर दी। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
प्रशासन का निर्णय और धार्मिक स्वतंत्रता का संघर्ष
दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए। इसके बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस बार डीएसए फ्लैट मैदान में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया कि वे मस्जिदों, घरों और निजी परिसरों में ही नमाज अदा करें।
प्रशासन के इस निर्णय के विरुद्ध अंजुमन ए इस्लामिया नैनीताल ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में कहा गया कि दशकों से इस मैदान में ईद की नमाज होती आ रही है और पहली बार इस पर रोक लगाई गई है। संस्था ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और परंपरा के खिलाफ बताया।
हाईकोर्ट का फैसला और विवाद का अंत
दिनभर चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद, मंगलवार को पूरे दिन इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और असमंजस बना रहा। मल्लीताल कोतवाली में आयोजित शांति समिति की बैठक में अंजुमन ए इस्लामिया के पदाधिकारियों ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के सामने हर वर्ष की तरह डीएसए मैदान में नमाज कराने की मांग रखी। इस दौरान एसडीएम ने कहा कि संबंधित विभागों से अनुमति और एनओसी मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसी बीच, पहले डीएसए महासचिव की ओर से नमाज की अनुमति दिए जाने की खबर आई, लेकिन कुछ ही देर बाद आदेश वापस ले लिया गया। इसके बाद मामला जिला प्रशासन के पक्ष में चला गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
मामला तब और तूल पकड़ गया जब जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजुनाथ टीसी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि डीएसए मैदान में नमाज या किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया कि वे मस्जिदों, घरों और निजी परिसरों में शांतिपूर्ण तरीके से ईद की नमाज अदा करें।
अंततः, हाईकोर्ट के आदेश से पूरे घटनाक्रम में बदलाव आया। न्यायालय ने कहा कि वर्षों से चली आ रही परंपरा को अचानक रोकना उचित नहीं है। कोर्ट के फैसले के बाद अब नैनीताल के ऐतिहासिक मैदान में ईद की नमाज का रास्ता साफ हो गया है।
इस फैसले के बाद यह मामला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह प्रशासनिक अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं के बीच संतुलन बनाने का विषय बन गया है, जिससे प्रदेश में नई बहस शुरू हो गई है।












