मुख्य बातें
- दिल्ली के मालवीय नगर में ‘फ्लरिश स्टे’ होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई।
- होटल में केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति थी, लेकिन 25 कमरे चलाए जा रहे थे।
- आग लगने के समय कई लोग दूसरी और तीसरी मंजिल से कूदकर बचने की कोशिश कर रहे थे।
- जांच एजेंसियां होटल की सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जांच कर रही हैं।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लरिश स्टे’ होटल में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली, जिसमें 6 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। यह होटल साकेत के मैक्स अस्पताल के निकट स्थित था और यहां ठहरने वाले अधिकांश लोग मरीज और उनके परिजन थे। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, जिसमें होटल की सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रमुख मुद्दा है।
आग लगने का कारण
होटल में आग लगने के समय, वहां ठहरे लोग एक तरह से मौत के जाल में फंस गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद कई मेहमानों ने दूसरी और तीसरी मंजिल से कूदकर जान बचाने की कोशिश की। स्थानीय लोगों ने नीचे गद्दे बिछाकर और रस्सियां फेंककर लोगों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन बेसमेंट में ठहरे मेहमानों को बचने का कोई मौका नहीं मिला।
होटल की सुरक्षा मानक
दिलचस्प बात यह है कि होटल को केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन यहां 25 कमरे चलाए जा रहे थे। होटल के पास वैध फायर एनओसी नहीं थी, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी को दर्शाता है। आग लगने के समय होटल के इंस्टाग्राम पेज पर प्रमोट किए गए सुविधाओं में से एक खिड़की, जो मैक्स अस्पताल का दृश्य दिखाती थी, कई लोगों के लिए जान बचाने का आखिरी रास्ता बन गई।
हादसे का प्रभाव
इस अग्निकांड में जिन 21 लोगों की मौत हुई है, उनमें 6 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो नाइजीरिया, लाइबेरिया, मोजाम्बिक और बांग्लादेश के निवासी थे। इसके अलावा, 9 भारतीय नागरिकों की भी जान गई है। हादसे के बाद, मैक्स अस्पताल ने कई घायलों को भर्ती किया, जिनमें से कुछ ने दूसरी और तीसरी मंजिल से कूदने के कारण फ्रैक्चर की शिकायत की।
जांच की स्थिति
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कैसे यह होटल बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के वर्षों तक संचालित होता रहा। इस घटना ने दिल्ली में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।











