मुख्य बातें
- दिल्ली में अवैध निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर एक्शन जारी है।
- यमुना के फ्लड जोन में 94 कॉलोनियों के 15 लाख घरों पर खतरा।
- डीडीए ने अतिक्रमण हटाने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किया।
- स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ी, पुनर्वास योजना का अभाव।
दिल्ली के कई इलाकों में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कार्रवाई यमुना के खादर क्षेत्र में की जा रही है, जिसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने ‘O’ जोन के तहत वर्गीकृत किया है। इस क्षेत्र में 94 कॉलोनियां शामिल हैं, जहां लगभग 15 लाख घरों को ध्वस्त करने का खतरा मंडरा रहा है।
अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई
30 अप्रैल को डीडीए ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि ओ-जोन क्षेत्र से सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि पीएम-उदय योजना के तहत आने वाली कॉलोनियों को छोड़कर अन्य सभी अनधिकृत आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लोगों को स्वयं स्थान खाली करने के लिए कहा गया है, अन्यथा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय निवासियों की चिंताएं
यमुना बाजार क्षेत्र में रहने वाले लगभग 310 परिवारों को 5 मई को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) द्वारा नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कहा गया कि यह क्षेत्र हर साल मानसून के दौरान जलमग्न हो जाता है, जिससे लोगों और संपत्तियों को खतरा होता है। हालांकि, DDMA के नोटिस में पुनर्वास योजना का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि यमुना किनारे अतिक्रमण बढ़ने से बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्यों में अतिरिक्त बोझ पड़ता है। एनजीटी ने पहले ही डीडीए को यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इस क्षेत्र में बाढ़ के दौरान गंभीर स्थिति उत्पन्न होने के कारण प्रशासन को बड़े पैमाने पर राहत कार्य करने पड़ते हैं।
भविष्य की कार्रवाई
दिल्ली सरकार का कहना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखना न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। इसलिए, नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।











