मुख्य बातें
- भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है।
- मई 2026 में कुल कार बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी 6.9 प्रतिशत रही।
- पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने ग्राहकों को ईवी की ओर आकर्षित किया।
- सरकारी नीतियों और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से ईवी की मांग बढ़ी है।
भारत की ऑटो इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बिक्री में तेजी आई है। मई 2026 में देशभर में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिसमें कुल कार बिक्री का 6.9 प्रतिशत हिस्सा ईवी का रहा। यह बदलाव पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के कारण हुआ है, जिससे ग्राहकों की रुचि इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ी है।
इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में वृद्धि
मई 2026 में भारत में कुल 3,17,354 यात्री वाहन बिके, जिनमें से 21,953 इलेक्ट्रिक कारें थीं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है, जो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी उछाल नहीं है, बल्कि उपभोक्ता की बदलती प्राथमिकताओं का संकेत है।
बढ़ती हिस्सेदारी का विश्लेषण
2026 की शुरुआत में ईवी की हिस्सेदारी 4.1 प्रतिशत थी, जो फरवरी में 4.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। अब यह बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि ग्राहकों का इलेक्ट्रिक वाहनों पर भरोसा बढ़ रहा है। पहले जहां बैटरी और चार्जिंग को लेकर चिंताएं थीं, वहीं अब ये चिंताएं कम होती जा रही हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों का प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे वाहन मालिकों के लिए खर्च बढ़ गया है। कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास हैं। इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक वाहनों की चलाने की लागत पारंपरिक ईंधन वाहनों की तुलना में कम है, जिससे लोग ईवी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
चार्जिंग स्टेशनों की बढ़ती संख्या और बैटरी की गुणवत्ता में सुधार ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ावा दिया है। अब देशभर में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे ईवी का उपयोग और भी सुविधाजनक हो गया है।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बढ़ती मांग
इलेक्ट्रिक क्रांति केवल कारों तक सीमित नहीं है। मई 2026 में देशभर में 16 लाख से अधिक टू-व्हीलर्स की बिक्री हुई, जिनमें करीब 1.44 लाख इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक शामिल थीं। इस तरह इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट की हिस्सेदारी 8.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
सरकारी नीतियों का योगदान
केंद्र और राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न नीतियों पर काम कर रही हैं। रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा, वाहन निर्माता कंपनियां बेहतर बैटरी तकनीक और तेज चार्जिंग विकल्पों वाले नए मॉडल पेश कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार इसी गति से जारी रहा और ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। मई 2026 के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भारत का ऑटोमोबाइल बाजार धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों को पूरी तरह से अपनाने की ओर बढ़ रहा है।












