मुख्य बातें
- उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर में होने की संभावना बढ़ी है।
- जनगणना के कारण चुनाव आयोग को समय से पहले चुनाव कराने की तैयारी करनी पड़ सकती है।
- सपा और बीजेपी दोनों दल चुनावी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
- जनवरी में ठंड के कारण चुनाव कराना मुश्किल होगा।
उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव अब नवंबर-दिसंबर में कराने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यह बदलाव जनगणना के कार्य को ध्यान में रखते हुए किया जा सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग को सूचित किया गया है कि इस दौरान जनगणना का काम तेजी से चलाना है। ऐसे में प्रशासनिक चुनौतियों के चलते समय से पहले चुनाव कराने की चर्चा जोरों पर है।
जनगणना का प्रभाव
जनगणना अभियान के तहत प्रशासनिक अमले को हर घर का फिजिकल वेरिफिकेशन करना है, जो देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक गतिविधियों में से एक है। जनगणना विभाग ने चुनाव आयोग को आगाह किया है कि फरवरी-मार्च में उनकी पूरी मशीनरी जनगणना के काम में व्यस्त रहेगी। ऐसे में चुनाव आयोग के लिए एक साथ दोनों कार्यों का संपन्न कराना मुश्किल होगा।
चुनाव आयोग की स्थिति
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के छह महीने पहले चुनाव कराए जा सकते हैं। इस स्थिति में, चुनाव को प्रीपोन करके नवंबर-दिसंबर में कराने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। यदि चुनाव समय पर नहीं कराए गए, तो उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।
राजनीतिक दलों की तैयारी
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के नेताओं को समय से पहले चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है। दोनों दलों के बीच चुनावी रणनीतियों पर मंथन जारी है, हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
जनवरी में चुनाव की संभावना
जनवरी में चुनाव कराना उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में कड़ाके की ठंड के कारण मुश्किल होगा। खराब मौसम चुनाव प्रचार को प्रभावित कर सकता है, इसलिए नवंबर और दिसंबर को चुनाव के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जा रहा है।
सपा और कांग्रेस की रणनीति
सपा का दावा है कि उनका संगठन चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि कांग्रेस भी अपनी चुनावी रणनीतियों पर काम कर रही है। बसपा प्रमुख मायावती भी उम्मीदवारों के चयन में जुटी हैं। सभी दल चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं, चाहे चुनाव कब भी हों।












