मुख्य बातें
- राजीव कृष्ण को उत्तर प्रदेश पुलिस का नया पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया गया है।
- वे 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
- राजीव कृष्ण ने एटीएस के डीआईजी के रूप में भी कार्य किया है।
- उनका कार्यकाल जून 2029 तक रहेगा, जो पुलिस भर्ती बोर्ड की कमान भी संभाल चुके हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस के नए पूर्णकालिक डीजीपी के रूप में राजीव कृष्ण की नियुक्ति की गई है। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण ने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिसमें लखनऊ के एसएसपी और एटीएस के डीआईजी शामिल हैं। उनकी नियुक्ति से पुलिस विभाग में सुधार और आधुनिक तकनीक के उपयोग की उम्मीद जताई जा रही है।
राजीव कृष्ण का करियर
राजीव कृष्ण ने अपने करियर की शुरुआत बतौर एएसपी इलाहाबाद, बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में की। 10 मई 1997 को उन्हें एसपी फिरोजाबाद बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, नोएडा और आगरा में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
लखनऊ में दो बार की तैनाती
राजीव कृष्ण लखनऊ पुलिस के एसएसपी के रूप में दो बार तैनात रहे हैं। पहली बार 1 दिसंबर 2006 से 16 मार्च 2007 तक और दूसरी बार जब लखनऊ-कानपुर-मेरठ में डीआईजी की व्यवस्था लागू हुई।
एटीएस में योगदान
मायावती सरकार के दौरान, राजीव कृष्ण को एटीएस का डीआईजी बनाया गया। उन्होंने इस पद पर रहते हुए यूपी एटीएस को आधुनिक संसाधनों से लैस किया, जिससे विभाग की कार्यक्षमता में सुधार हुआ।
भर्ती बोर्ड की जिम्मेदारी
मार्च 2024 में जब उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड की परीक्षा में पेपर लीक हुआ, तब राजीव कृष्ण को भर्ती बोर्ड की कमान सौंपी गई। उन्होंने बिना किसी विवाद के 60244 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया।
कार्यकाल की अवधि
राजीव कृष्ण का कार्यकाल 31 मई 2026 तक रहेगा, जब कार्यवाहक डीजीपी प्रशांत कुमार का रिटायरमेंट हुआ था। उनके पास जून 2029 तक का कार्यकाल बचा है, जिससे पुलिस विभाग में स्थिरता और सुधार की उम्मीद की जा रही है।












