मुख्य बातें
- कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर पैराग्लाइडर की इमरजेंसी लैंडिंग हुई।
- पायलट और पर्यटक सुरक्षित, लेकिन सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।
- पैराग्लाइडिंग हादसों के चलते प्रशासन ने कई साइटों पर संचालन रोका।
- विशेषज्ञों ने सख्त सुरक्षा मानकों की मांग की है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में तेज हवाओं के कारण एक पैराग्लाइडर को कटराईं क्षेत्र में कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। इस घटना में पायलट और पर्यटक सुरक्षित बच गए, लेकिन यह घटना पैराग्लाइडिंग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। पिछले वर्षों में कुल्लू में कई पैराग्लाइडिंग हादसों में पर्यटकों की जान जा चुकी है।
हादसे का विवरण
कटराईं में हुई इस घटना के अलावा, ढालपुर में एक टेंडम पैराग्लाइडर तेज हवा के कारण पेड़ से टकरा गया, जिसके बाद फायर ब्रिगेड को बचाव अभियान चलाना पड़ा। दिसंबर 2025 में गरसा साइट पर उपकरण में खराबी आने से एक पर्यटक करीब 80 फीट नीचे गिर गया था। इन लगातार हादसों के चलते प्रशासन ने कई पैराग्लाइडिंग साइटों पर संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
सुरक्षा मानकों की कमी
अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और निगरानी की कमी के कारण जोखिम बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्यटन विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते पर्याप्त निगरानी नहीं हो पा रही है। कई पायलट बिना जरूरी लाइसेंस के उड़ान भर रहे हैं, और कुछ मामलों में खराब क्वालिटी के उपकरणों के इस्तेमाल की भी शिकायतें आई हैं।
विशेषज्ञों की मांग
विशेषज्ञों और अधिकारियों ने एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए सख्त सुरक्षा मानकों और स्थायी नियामक व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। कटराईं की यह घटना इसी आवश्यकता की एक और चेतावनी मानी जा रही है।












