दिल्ली में जल संकट की भयावह स्थिति
राजधानी दिल्ली वर्तमान में गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। ताजा ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई तस्वीरें चौंकाने वाली हैं, जिनमें यमुना नदी का जलस्तर इतना गिर चुका है कि कई स्थानों पर नदी का तल स्पष्ट दिखाई दे रहा है। यह स्थिति राजधानी के जल स्रोतों की गंभीरता को दर्शाती है।
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, संवाददाता सुशांत मेहरा अपनी टीम के साथ सीधे यमुना नदी के बीच में पहुंचे, जहां सामान्यतः पानी बहता था। लेकिन इस बार का दृश्य पूरी तरह से अलग है। नदी सूखी सी प्रतीत हो रही है और पानी की पतली धारा भी मुश्किल से नजर आ रही है।
वजीराबाद प्लांट पर जल स्तर का प्रभाव
वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट भी इस जल संकट से बुरी तरह प्रभावित है। इस प्लांट तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक जलस्तर 674.50 फीट है, लेकिन वर्तमान में यह घटकर 667.50 फीट पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि पानी लगभग 7 फीट नीचे चला गया है, जिससे मोटर पंप भी पानी खींचने में असमर्थ हो रहे हैं और उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
मजदूरों की मदद से नदी के अंदर अस्थायी रास्ता (चैनल) बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पानी को प्लांट तक पहुंचाया जा सके। सोनिया विहार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तक यह छोटा रास्ता बन चुका है। मजदूर लगातार पानी से रेत को अलग कर रहे हैं ताकि पानी का प्रवाह तेजी से ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच सके। यह स्थिति दर्शाती है कि जल संकट कितने गंभीर रूप ले चुका है।
जल आपूर्ति में कमी और प्रभावित क्षेत्र
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली को प्रतिदिन लगभग 1100 मिलियन गैलन (MGD) पानी की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 900 MGD ही मिल पा रहा है। यानी करीब 200 MGD पानी की कमी हो रही है, जिसका सीधा असर शहर के कई इलाकों पर पड़ रहा है।
सेंट्रल, नॉर्थ और ओल्ड दिल्ली के कई हिस्सों में पानी की भारी किल्लत है। लोग घंटों लाइनों में खड़े होकर पानी भरने को मजबूर हैं, और कई स्थानों पर टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से लगभग 127 MGD पानी की आपूर्ति होती है, जो दिल्ली का सबसे बड़ा जल संसाधन है।
यमुना के सूखने के कारण और कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना नदी के सूखने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें हरियाणा से कम पानी छोड़ा जाना, बढ़ती गर्मी और वाष्पीकरण, वर्षा की कमी और नदी में प्राकृतिक प्रवाह का पहले से ही कम होना शामिल है। इन सभी कारकों ने मिलकर राजधानी के जल संकट को और भी गहरा कर दिया है।











