इलाहाबाद हाईकोर्ट का हुक्का बार पर बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच ने हुक्का बार संचालन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि हुक्का बार चलाना नागरिक का मौलिक अधिकार नहीं है। इस फैसले में कोर्ट ने जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए राज्य सरकार के इस प्रतिबंध लगाने के अधिकार को पूरी तरह से सही ठहराया है। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने बुधवार को इस संबंध में अपना निर्णय सुनाया।
हुक्का बार मालिकों की दलीलें खारिज
कोर्ट ने उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें हुक्का बार संचालकों ने तर्क दिया था कि यह व्यवसाय उनके मौलिक अधिकारों में शामिल है। हुक्का बार के ऑपरेटरों ने प्रशासन द्वारा उनके प्रतिष्ठानों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विरोध करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। इन याचिकाओं में कहा गया था कि उनके हुक्का बार बंद कराना और नए लाइसेंस न देना अवैध है।
कोर्ट का निर्णय और महामारी के दौरान प्रतिबंध
अपनी सुनवाई में कोर्ट ने पुराने आदेशों का हवाला देते हुए बताया कि जब देश में कोविड-19 महामारी का प्रकोप चरम पर था, तब भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए पूरे राज्य में हुक्का बार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि हुक्का बार में तंबाकू और निकोटीन का सेवन होता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए, सरकार को इस तरह के व्यवसाय पर नियम लगाने या प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शराब और जुए की तरह हुक्का बार को भी सुरक्षा के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, और राज्य सरकार के पास जनता की सेहत की रक्षा के लिए इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाने का पूरा अधिकार है।












