मुख्य बातें
- यूपी के वाराणसी में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली बृजेश गंझू का एनकाउंटर हुआ।
- बृजेश झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन TPC का कमांडर था।
- पुलिस ने बृजेश को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उसने फायरिंग की।
- बृजेश पर कई गंभीर आरोप थे, जिसमें टेरर फंडिंग और रंगदारी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार सुबह एक महत्वपूर्ण एनकाउंटर में 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की मौत हो गई। बृजेश झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का कमांडर था, जिस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और एनआईए ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इस एनकाउंटर ने सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता को उजागर किया है।
एनकाउंटर की जानकारी
पुलिस के अनुसार, बृजेश गंझू झारखंड के चतरा जिले के लूटू थाना क्षेत्र का निवासी था। वह TPC से जुड़ा हुआ था और कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहा था, जिनमें टेरर फंडिंग, रंगदारी, और पुलिस पर हमले शामिल हैं। बृजेश की गिरफ्तारी के लिए झारखंड और एनआईए दोनों ने इनाम घोषित किया था।
घटना का विवरण
20 सितंबर की सुबह, बृजेश अपने एक साथी के साथ बाइक पर मुगलसराय की ओर जा रहा था। इसी दौरान एटीएस को सूचना मिली कि वह वाराणसी में मौजूद है। पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन बृजेश ने बाइक से कूदकर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में बृजेश को गोली लगी, और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
बृजेश के आपराधिक रिकॉर्ड
बृजेश गंझू पर झारखंड के कोयलांचल इलाकों में सक्रिय कंपनियों और ठेकेदारों से वसूली करने के आरोप थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह जुटाई गई रकम का इस्तेमाल नक्सली गतिविधियों के लिए करता था। उसके खिलाफ दर्जनों मुकदमे थे, जिनमें से कुछ की जांच एनआईए कर रही थी।
पुलिस की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बताया कि बृजेश गंझू के खिलाफ 45 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में नक्सली गतिविधियां खत्म हो चुकी हैं, लेकिन कुछ स्लीपर सेल अभी भी सक्रिय हैं। एनकाउंटर के दौरान बृजेश के साथ एक अन्य व्यक्ति भी था, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।







