मुख्य बातें
- भोपाल में नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्तियों की जांच तेज हुई है।
- सैफ अली खान और उनका परिवार भी इस मामले में शामिल हैं।
- 1370 एकड़ जमीन की कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं।
- आफताब जहां बेगम द्वारा बेची गई संपत्तियों की जांच चल रही है।
भोपाल में नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम द्वारा बेची गई संपत्तियों के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जांच को तेज कर दिया है। इस मामले में अभिनेता सैफ अली खान और उनका परिवार भी शामिल है, जिसमें सोहा अली खान, सबा अली खान और शर्मिला टैगोर का नाम भी शामिल है। यह मामला 1370 एकड़ जमीन की कानूनी स्थिति को लेकर है, जो अब जांच के दायरे में है।
जांच की पृष्ठभूमि
ईओडब्ल्यू ने प्रधानमंत्री कार्यालय और महानिदेशक को भेजी गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री को पूछताछ के लिए बुलाया। उन्होंने अपने अधिवक्ता प्रशांत पांडे के साथ ईओडब्ल्यू को लिखित साक्ष्य और दस्तावेज सौंपे। यह मामला भोपाल के कोहेफिजा, नयापुरा और हलालपुर इलाकों में नवाबी संपत्तियों से संबंधित है।
संपत्तियों की कानूनी स्थिति
शिकायती आवेदन में कहा गया है कि सैफ अली खान ने पहले हाईकोर्ट में 1370 एकड़ जमीन को नवाब की संभावित व्यक्तिगत संपत्ति के रूप में दर्शाया था। जांच कमेटी से इन संपत्तियों की स्थिति बताने की मांग की गई है। नवाब हमीदुल्ला खान की बड़ी बेटी पाकिस्तान चली गई थी, जिसके कारण उनकी संपत्तियां शत्रु संपत्ति घोषित हो गईं।
आफताब जहां बेगम का सौदा
31 मई 1994 को आफताब जहां बेगम ने बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि को सहकारी गृहनिर्माण संस्था को 30.55 लाख रुपये में बेचा। सौदे के समय केवल 1.55 लाख रुपये चेक के माध्यम से लिए गए, जबकि शेष 29 लाख रुपये चार किस्तों में लेने का अनुबंध किया गया था। आरोप है कि शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू होने के बावजूद पाकिस्तान निवासी होने का तथ्य छिपाकर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि का सौदा किया गया।
जांच के मुख्य बिंदु
जांच में कस्टोडियन विभाग मुंबई और भोपाल कलेक्टर द्वारा नवाब की संपत्तियों को ‘शत्रु संपत्ति’ दर्ज करने के निर्देशों पर पिछले चार वर्षों में हुई कार्रवाई की जांच की जाएगी। इसके अलावा, सैफ अली खान से 29 अप्रैल 1949 को बीपी मेनन द्वारा हस्ताक्षरित नक्शे, 30 अप्रैल 1949 के ‘मर्जर एग्रीमेंट’ और 1 जून 1949 से पूर्व बनी संपत्ति सूची की मूल कॉपियां मांगी जाएंगी।
पूर्व भोपाल रियासत के 2,556 गांवों में नवाब परिवार की जमीनों की भी जांच की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, मर्जर एग्रीमेंट में 1395 एकड़ भूमि दर्ज थी, जबकि 9 गांवों में 1984.13 एकड़ अतिरिक्त भूमि नवाब परिवार के नाम कैसे दर्ज हुई, इसकी भी जांच की जाएगी।







