मुख्य बातें
- पुणे में अवैध भ्रूण लिंग जांच रैकेट का खुलासा, कई गिरफ्तारियां हुईं।
- पुलिस ने 30 से 50 भ्रूण लिंग जांच हर महीने होने की पुष्टि की।
- जांच में शामिल डॉक्टरों और अस्पतालों के संबंधों की जांच जारी।
- अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत केस दर्ज।
महाराष्ट्र के पुणे जिले में अवैध भ्रूण लिंग जांच और लिंग चयन के आधार पर गर्भपात कराने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि यह संगठित नेटवर्क पिछले कई वर्षों से सक्रिय था, जिसमें हर महीने दर्जनों गर्भवती महिलाओं की अवैध लिंग जांच की जाती थी। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
कैसे हुआ खुलासा
पुलिस के अनुसार, 14 मई 2026 को डॉ. सचिन गुर्जर को एक वीडियो मिला, जिसमें एक महिला की अवैध भ्रूण लिंग जांच होती हुई दिखाई गई थी। वीडियो की पुष्टि के बाद 19 मई को दौंड तालुका के केडगांव निवासी अन्नासाहेब गिरी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। पुलिस ने अगले दिन ही उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान अन्नासाहेब ने अपने कई सहयोगियों के नाम बताए, जिसके आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की गई।
आरोपियों की जानकारी
पुलिस ने वाघोली निवासी अतुल जाधव, केसनंद निवासी नरेंद्र ठाकरे, भोर निवासी मंदार माली और उरुलीकांचन निवासी सुंदरम कदम को मामले में आरोपी बनाया है। 24 मई को अतुल जाधव को गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। नरेंद्र ठाकरे फिलहाल एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है।
जांच में क्या मिला
जांच के दौरान पुलिस ने एक सोनोग्राफी मशीन भी जब्त की, जिसका उपयोग कथित तौर पर भ्रूण का लिंग पता लगाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा, अवैध जांच की प्रक्रिया से जुड़ा वीडियो भी बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि अन्नासाहेब गिरी ने खुद इस तरह की जांच कराने की बात स्वीकार की है।
नेटवर्क का विस्तार
पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल के अनुसार, अन्नासाहेब गिरी मूल रूप से अहिल्यानगर जिले का निवासी है। उसने बारहवीं तक पढ़ाई की है और फार्मेसी का कोर्स भी आंशिक रूप से किया है। जांच में यह भी पता चला है कि उसने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपने संपर्कों का उपयोग कर इस अवैध नेटवर्क को संचालित किया। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क केवल पुणे तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य जिलों में भी सक्रिय हो सकता है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि 12 से 15 डॉक्टरों और अस्पतालों का भी इस नेटवर्क से संपर्क हो सकता है। अब तक 15 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह द्वारा कराई गई अवैध भ्रूण लिंग जांच की वास्तविक संख्या काफी बड़ी हो सकती है, जिसका खुलासा दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद होगा।












